Yamunanagar News: झूठे केस में फंसाने वाले 5 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, कोर्ट ने जारी किया समन
यमुनानगर में सट्टाखाई के झूठे केस में फंसाने वाले पांच पुलिस कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कोर्ट ने सभी को समन भेजा है। राम अवतार को 2019 में पुलिस ने दर्जी की दुकान से उठाया था और सट्टाखाई का केस दर्ज किया था लेकिन बाद में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। कोर्ट ने पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिया है।

संवाद सहयोगी, जगाधरी (यमुनानगर)। सट्टाखाई के झूठे केस में फंसाने वाले पांच पुलिस कर्मचारियों की मुश्किलें बढती नजर आ रही है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास रिषभ अग्रवाल की कोर्ट ने एएसआई किरण, एएसआइ जितेंद्र, एचसी लाभ सिंह, एचसी रणदीप सिंह और सेवानिवृत एसआइ राजबीर को कोर्ट में पेश होने के लिए सम्मन भेजे हैं।
मामले की सुनवाई के लिए 26 अगस्त को होगी। बता दे कि पुलिस कर्मियों ने 19 सितंबर 2019 को राम अवतार को दर्जी की दुकान से उठाकर उसके खिलाफ सट्टाखाई का केस दर्ज किया था। मामला साढौरा थाने में दर्ज है।
हालांकि, व्यासपुर स्थित जेएमआइसी गुलशन वर्मा की कोर्ट ने सट्टाखाई के आरोपित रामअवतार को चार दिसंबर 2024 को बरी कर चुकी है, लेकिन राम अवतार के खिलाफ झूठा केस दर्ज करने पर कोर्ट ने मामले में संलिप्त पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृहमंत्री हरियाणा सरकार, मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष, पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट यमुनानगर व एसपी फैसले की प्रति भेजी थी।
पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ इन धाराओं के तहत होगी सुनवाई
आरोपी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 12\B0-बी, 166, 166-ए, 177, 181, 182, 193, 196, 199, 200, 202, 203, 209, 211, 218, 220, 342, 352, 417, 418, 448, 452, 466, 467, 468, 469, 471 और 1860 और 351 (2) बीएनएस, 2023 के तहत कोर्ट में केस शुरू किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस कर्मचारियों ने राम अवतार के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 के तहत 19 सितंबर 2019 को झूठी व मनगढंत एफआईआर दर्ज की। साथ ही झूठे व मनगढंत दस्तावेज तैयार किए। जिन्हें रामअवतार पर केस चलाने के लिए सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने अपने आधिकारिक कार्य के निर्वहन में पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की है। शिकायत के साथ संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन से पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसलिए उन्हें सम्मन जारी कर कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए गए हैं।
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