इंस्पेक्टर के अब खुले ये बड़े राज, मोटी रकम की चाह में शुरू से ही था खतरनाक इरादा; अफसर भी हैरान
सोनीपत के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिज़ाइन में अफीम की खेती के मामले में जांच करने वाले एसआईटी सदस्य इंस्पेक्टर तेजराम पर रिश्वत लेने का आरोप लगा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में वह आरोपी धर्मेंद्र मिश्रा को गिरफ्तार करने के बदले 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

जागरण संवाददाता, सोनीपत। सोनीपत में राई की राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन में फूलों की क्यारियों के बीच की जा रही अफीम की खेती के मामले में जांच करने वाला ही भक्षक बन बैठा।
यूनिवर्सिटी में अफीम की खेती के प्रश्नों ने जब मुख्यमंत्री को घेरा तो उन्होंने इसकी जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद एसआईटी बनी। इसके मेंबर के रूप में सीआईए के प्रभारी इंस्पेक्टर तेजराम ने तेजी से जांच शुरू की, लेकिन इसकी रिपोर्ट सौंपने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने लाभ के लिए।
बताया गया कि आरोपी इंस्पेक्टर शुरू से ही इस मामले में मोटा हाथ मारने की फिराक में था। जैसे ही यूनिवर्सिटी के फरार आरोपी धर्मेंद मिश्रा के बारे में उसे सूचना मिली तो उसने इसे 15 लाख रुपये की रिश्वत के रूप में कैश कर लिया, लेकिन शिकायत होते ही अप्रैल के पहले सप्ताह में ही उस पर गाज गिर गई और उसे लाइनहाजिर कर दिया गया।
इसके बाद दूसरी एसआईटी बनाकर मामले की जांच शुरू की गई। आठ मई को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
यह था मामला
सीआइए-1 में नियुक्त एएसआई सुरेंद्र की टीम ने 28 मार्च को वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन में अफीम की खेती होने की सूचना पर कैंपस में जांच की। वहां अफीम के 400 पौधे होने का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के जिला सुल्तानपुर के गांव मेघमऊ के रहने वाले माली संतलाल को गिरफ्तार कर लिया।
एसआइटी बनाकर जांच शुरू की गई
वहीं, जांच में सामने आया था कि अफीम के बीज दिल्ली से मंगवाए गए थे। संतलाल के रिमांड के दौरान यूनिवर्सिटी के सुपरवाइजर उत्तर प्रदेश के कन्नौज के रहने वाले धर्मेंद्र मिश्रा का नाम सामने आया था। इस प्रकरण में एसीपी अजीत सिंह, इंस्पेक्टर तेजराम और कमल की एसआइटी बनाकर जांच शुरू की गई। तभी फरार आरोपित धर्मेंद्र मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाने लगी।
आरोपी धर्मेंद्र मिश्रा की लोकेशन मिलने पर यूनिवर्सिटी के अधिकारी पर उसे घर में छिपाकर रखने का भय दिखाया गया। इंस्पेक्टर तेजराम पर आरोप लगे कि उसने यूनिवर्सिटी के एक बड़े पदाधिकारी से 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
रिश्वत की राशि लौटा दी
सूत्रों ने बताया कि एक वकील के माध्यम से रिश्वत के रुपयों का लेनदेन हुआ। इसके बाद मामले की सूचना सोनीपत पुलिस आयुक्त तक पहुंची। पुलिस आयुक्त ने अप्रैल के पहले सप्ताह में तेजराम को लाइनहाजिर कर दिया। सूत्रों का कहना है कि हालांकि बाद में रिश्वत की राशि लौटा दी गई।
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सभी पुलिस कर्मियों को आम लोगों के केसों को प्राथमिकता के साथ निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। ड्यूटी के दौरान गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करने वाले पुलिकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। इस मामले में आरोपी को लाइनहाजिर किया गया था, बाद में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। - नाजनीन भसीन, पुलिस आयुक्त, सोनीपत
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