वार्डन मौत मामला: 'जेल में नशा व गैर कानूनी गतिविधियां, सहयोग नहीं करने पर किया प्रताड़ित'; बेटे के आरोप से सनसनी
सिरसा जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह की मौत ने जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वजनों के अनुसार, उन्हें लगातार नाइट ड्यूटी और मानसिक प्रता ...और पढ़ें

जेल वार्डन पिता की मौत पर बेटे ने लगाए आरोप। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, सिरसा। जिला जेल सिरसा में कार्यरत वार्डन सुखदेव सिंह की मौत ने जेल प्रशासन और पुलिस तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक कर्मचारी की आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसमें मानसिक प्रताड़ना, ड्यूटी व्यवस्था, जातिगत उत्पीड़न और कथित भ्रष्ट गतिविधियों के आरोप भी जुड़ते चले गए हैं।
स्वजन के अनुसार सुखदेव सिंह लंबे समय से लगातार नाइट ड्यूटी लगाए जाने से मानसिक रूप से परेशान थे। उन्होंने कई बार लाइन आफिसर और डीएसपी जेल सुरक्षा से ड्यूटी बदलने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। स्वजन का कहना है कि लगातार अनसुनी और दबाव के चलते सुखदेव गहरे तनाव में चले गए थे। इसी तनाव के बीच एक जनवरी की शाम उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया।
बेटे ने जेल में नशा बिक्री का किया खुलासा
मृतक के बेटे जसपाल सिंह उर्फ जेपी ने जेल अधिकारियों पर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जेल में नशे की बिक्री और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां होती थीं, जिनमें सहयोग करने से उनके पिता ने इंकार कर दिया था।
इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। स्वजन ने इसे केवल प्रशासनिक दबाव नहीं, बल्कि साजिशन उत्पीड़न बताया है। जेपी ने बताया कि अपनी नौकरी के दौरान सुखदेव सिंह पूरी तरह ईमानदार और निष्पक्ष तरीके से कर्त्तव्य का पालन किया, परंतु उनकी सुनवाई नहीं हुई।
पुलिस जांच पर उठाया सवाल
पोस्टमार्टम से पहले मोर्चरी के बाहर हुआ विरोध इस बात का संकेत है कि परिवार और बिरादरी को जांच पर भरोसा नहीं था। हालांकि डीएसपी ला एंड आर्डर द्वारा खुद उनको अपनी बिरादरी से होने का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिलाया तब जाकर स्वजन माने।
दोपहर को शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे स्वजन को हवाले कर दिया। अब पुलिस के लिए सुसाइड नोट, स्वजन के बयान और ड्यूटी रिकार्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिस पर पूरे मामले की सच्चाई टिकी हुई है।
सुसाइड नोट में अधिकारियों पर जड़े थे प्रताड़ना के आरोप
मृत्यु से पहले छोड़ा गया सुसाइड नोट इस मामले का सबसे अहम आधार बनकर सामने आया है। सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने डीएसपी जेल सुरक्षा और लाइन आफिसर पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
उन्होंने साफ लिखा कि इन अधिकारियों के व्यवहार और दबाव के कारण वह यह कदम उठाने को मजबूर हुए। सुसाइड नोट में जेल अधीक्षक से न्याय की गुहार भी लगाई गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह अंतिम समय तक किसी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे।

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