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    'विश्व को मार्गदर्शन करने के लिए भारत को आंतरिक तौर पर करना होगा मजबूत', रोहतक में बोले दत्तात्रेय होसबाले

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 09:58 PM (IST)

    दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए आंतरिक रूप से मजबूत होना होगा। संघ 100 वर्षों से इस दिशा में कार्यरत है। उन्होंने ...और पढ़ें

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    रोहतक में नशा को लेकर क्या बोले दत्तात्रेय होसबाले? फोटो जागरण

    जागरण संवाददाता, रोहतक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सकें, इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा। आंतरिक ताकत देनी होगी और संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है।

    उन्होंने कहा कि देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सदभाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होंगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा।

    वह रविवार को रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका विषय पर आयोजित सामाजिक सदभाव विचार गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, क्षेत्र प्रचारक जतिन कुमार, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर, क्षेत्र कार्यवाह रोशन लाल, प्रांत संघचालक प्रताप सिंह, प्रचारक डा. सुरेंद्र पाल, कार्यवाह डा. प्रताप सिंह, सहकार्यवाह राकेश, डा. प्रीतम सिंह, प्रचार प्रमुख राजेश कुमार मौजूद रहे।
    दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत प्राचीन काल में सोने की चिड़िया कहलाता था, इसलिए भारत ने विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों को भी झेला है। उन्होंने कहा कि 1600 ई में जब इंग्लैंड में ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापना हुई, उस समय भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार व्यवस्था में 23 प्रतिशत हिस्सा था।

    इससे यह पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत आर्थिक तौर पर कितना समृद्ध था। हमारी ज्ञान परंपरा, संस्कृति विश्व के सभी देशों से अच्छी थी, हम समस्त विश्व को एक कुटुम्ब व भारत के सभी धर्मों, परंपराओं, रीति-रिवाजों को अपना मानते हैं।

    एक चीटी में भी ईश्वर का अंश देखते हैं, लेकिन हम जाति-पाति, भिन्न-भिन्न पंथों में बंट गए और विदेशी आक्रांताओं ने इसका फायदा उठाया और हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। इसका परिणाम यह रहा कि देश की स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

     

    युवाओं को नशे से बचाने के लिए सबको करने होंगे सामूहिक प्रयास

    दत्तात्रेय होसबाले ने कार्यक्रम में समाज के लोगों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि समाज में चिंतन-मंथन होते रहना चाहिए। इससे ही समाज की उन्नत्ति होती है और संघ इसके लिए ही कार्यरत है। इसके अलावा संघ का कोई विशेष एजेंडा नहीं है।

    उन्होंने नैतिक शिक्षा, गीता व भगवत गीता के एक सवाल के जवाब में कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाया जा सके, धार्मिकता समझाई जा सके, इसके लिए नई शिक्षानीति में प्रयास किए गए हैं, लेकिन वर्षों से जो पाठयक्रम हम पढ़ते आ रहे हैं उसको दिमाग से निकलने में समय लगेगा।

    युवाओं को नशे से बचाने के लिए सबको सामूहिक प्रयास करने होंगे। क्योंकि यह एक तरह से अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र है।