Haryana News: ट्रेन हादसे में गंवा दिया अपना पैर... फिर भी नहीं मानी हार, अब बन गए EPFO अधिकारी; पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी
कहते हैं कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती चाहे कितनी भी मुसीबतें सामने क्यों न आ जाएं सूरमा अपनी मंजिल को पा ही लेते हैं। ऐसा ही कारनामा कर दिखाया बहादुरगढ़ के दीपक तिवारी ने। जिनका रेल हादसे में एक पैर कटा गया लेकिन उन्होंने अपने जीवन में निराशा नहीं आने दी और यूपीएससी की तैयारी करके ईपीएफओ बन गए। तो पढ़िए उनकी Success Story...

जागरण संवाददाता, रोहतक (बहादुरगढ़)। तीन साल पहले ट्रेन हादसे में घुटने से नीचे दायां पैर गंवाने वाले बहादुरगढ़ की गुरु नानक कालोनी निवासी दीपक तिवारी सहायक भविष्य निधि आयुक्त(ईपीएफओ) बने हैं। यूपीएससी की ईपीएफओ की परीक्षा में दीपक ने 105वां रैंक हासिल किया है।
यूपीएससी को पहली बार में नहीं कर पाए क्लियर
ट्रेन दुर्घटना के बाद अस्पताल में दाखिल रहने के दौरान ही छोटे भाई रवि तिवारी की प्रेरणा से दीपक को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा देने की धुन सवार हुई। उसी दिन से दीपक परीक्षा की तैयारियों में जुट गए। सिविल सेवा की पहली बार हुई परीक्षा में तो दीपक असफल रहे लेकिन ईपीएफओ की परीक्षा के पहले ही प्रयास में वे सफल हो गए।
छोटे भाई के साथ रहकर की पढ़ाई
बीटेक मैकेनिकल की पढ़ाई करके गाजियाबाद में इंजीनियर की नौकरी करने वाले दीपक अब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारियों में भी लगे हुए हैं। उनके भाई रवि तिवारी जनस्वास्थ्य विभाग में वाटर पंप ऑपरेटर हैं और साथ में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। दोनों भाई एक-साथ पढाई करते हैं।
बीटेक करके प्राइवेट कंपनी में कर रहे थे जॉब
दीपक के ईपीएफओ बनने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। मूल रूप से यूपी के गोंडा के रहने वाले दीपक तिवारी का परिवार वर्ष 1963 से यहां की गुरु नानक कालोनी में रहता है। दीपक के पिता देव प्रसाद तिवारी यहां पर वर्कशाप चलाते थे। दीपक ने त्रिवेणी स्कूल से 12वीं पास की और इसके बाद आसौदा स्थित एक संस्थान से बीटेक किया। वे गाजियाबाद की एक कंपनी में इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं।
नांगलोई रेलवे स्टेशन पर हुआ था हादसा
दीपक ने बताया कि 12 नवंबर 2021 को नांगलोई रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होते समय उसका पैर फिसल गया था और नीचे गिर गया था। ऐसे में उसे काफी चोट आई थीं और उसका घुटने से नीचे का दायां पैर काटना पड़ा था। मैं कई महीने तक अस्पताल में भर्ती रहा। इस दौरान मैं मायूस रहने लगा था। बिस्तर पर पड़ा सोचता रहता था कि मैं ठीक ढंग से चल पाऊंगा या नहीं।
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पत्नी योगा टीचर और परिवारजनों ने दिया सहयोग
दीपक ने बताया कि अस्पताल में अटेंडेंट के तौर पर मेरा छोटा भाई रवि भी साथ में रहता था। रवि यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। भाई के साथ मुझे भी यूपीएससी की तैयारी करने की धुन सवार हो गई। इसमें मेरी पत्नी योगा टीचर दामिनी व अन्य स्वजनों ने भी साथ दिया और मेरा मनोबल कम नहीं होने दिया। अस्पताल से घर आने के बाद मैं भी यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी जोर शोर से करने लगा।
दीपक ने दिया अपनी सफलता का मंत्र
पिछले दिनों सिविल सेवा परीक्षा के पहले प्रयास में तो मैं असफल रहा लेकिन कुछ माह पहले ईपीएफओ की परीक्षा में पास हो गया। मेरा 105वां रैंक आया है। दीपक ने बताया कि मैंने अपने भाई के साथ खूब तैयारी की है। सेल्फ स्टडी की है। इसका यूपीएससी परीक्षा में काफी अहम रोल रहा। दीपक ने युवाओं से आह्वान किया है वे चुनौतियों का डटकर सामना करें। उनसे डरे नहीं। जरा सी असफलता पर निराश न हों, बल्कि उससे अनुभव लेकर आगे बढ़े। सफलता जरूर मिलेगी।
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