Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    Panipat News: इनेलो के जिलाध्यक्ष के भाई का अभी तक नहीं मिला शव, हत्या के आठ दिन बाद मिली थी स्वजन को जानकारी

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 06:06 PM (IST)

    पानीपत में इनेलो जिलाध्यक्ष कुलदीप राठी के भाई जयदीप राठी के अपहरण और हत्या मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। 27 दिसंबर को अपहरण ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    इनेलो अध्यक्ष कुलदीप के घर पर मौजूद लोग। फोटो जागरण

    जागरण संवाददाता, पानीपत। इनेलो के जिलाध्यक्ष कुलदीप राठी के भाई जयदीप राठी के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 27 दिसंबर को जयदीप राठी का अपहरण हुआ था, लेकिन पुलिस ने आठ दिन बाद स्वजन को उनकी हत्या की जानकारी दी। अब तक जयदीप का शव भी बरामद नहीं हो पाया है।

    स्वजन ने बताया कि अपहरण के कुछ समय बाद जयदीप की कार पंजाब के जीरकपुर में लावारिस हालत में खड़ी मिली थी। प्रारंभिक जांच में जमीनी विवाद को अपहरण की वजह माना गया। जयदीप के स्वजन ने सुनील शर्मा, रवि और प्रीतम सरदार पर अपहरण और हत्या का शक जताया था।

    इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने कबूल किया कि 27 दिसंबर को ही जयदीप राठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद शव को अधजली हालत में नहर में फेंक दिया गया। रविवार को पुलिस ने स्वजन को जयदीप की हत्या की सूचना दी, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। स्वजन का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो जयदीप जिंदा होता।

    स्वजनों ने उठाए पुलिस पर गंभीर सवाल

    जयदीप राठी के स्वजन ने पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्वजन ने कहा कि 27 दिसंबर को अपहरण की सूचना देने के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

    आरोप है कि यदि पहले दिन से ही सख्ती दिखाई जाती और संदिग्धों से गहन पूछताछ की जाती, तो जयदीप की जान बचाई जा सकती थी या कम से कम शव को बरामद किया जा सकता था।

    स्वजन ने बताया कि उन्होंने पुलिस को शुरू से ही सुनील शर्मा, रवि और प्रीतम सरदार के नाम बताए थे लेकिन पुलिस ने आठ दिन बाद हत्या की जानकारी दी।

    इस दौरान परिवार लगातार पुलिस थानों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही दिए गए। स्वजन ने कहा कि आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस ने सच्चाई छिपाए रखी। हत्या की जानकारी देर से देना और अब तक शव बरामद न कर पाना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है।