धार्मिक स्थलों को लेकर हरियाणा पुलिस महकमे में फिर विवाद, अब प्रशासनिक अधिकारियों से मांगा ब्योरा
हरियाणा में धार्मिक स्थलों को लेकर पुलिस महकमे में फिर विवाद उभरकर आया। वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आपदा प्रबंधन एवं चकबंदी विभ ...और पढ़ें

अंबाला, [दीपक बहल]। हरियाणा में धार्मिक स्थलों को लेकर पुलिस महकमे में उभरा विवाद अब प्रशासनिक अधिकारियों के पाले में आ गया है। वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आपदा प्रबंधन एवं चकबंदी विभाग ने राज्य के सभी मंडलायुक्त व डीसी को पत्र लिखकर सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों का ब्योरा मांगा है। पहले यह मामला सिर्फ पुलिस थानों और चौकियों तक था, लेकिन अब जिलों के सभी डीसी को सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों का ब्योरा देना है।
राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों को वैधानिक करार देने पर विचार कर रही है। इससे पहले पुलिस महकमे से भी धार्मिक स्थलों को लेकर जानकारी मांगी थी, जिसकी जांच एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने की थी। हालांकि बिना अनुमति धार्मिक स्थल बनाना पंजाब पुलिस रूल 3.3(2) तथा आल इंडिया सिविल सर्विसेज कंडक्ट रूल 1968 का उल्लंघन माना जाता है।
इसको लेकर एडीजीपी ने पंजाब पुलिस रूल में ही संशोधन की सिफारिश की थी और अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि संविधान में अपने धर्म के अनुसरण का सभी को मौलिक अधिकार सब को प्रदान किया गया है। सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में धर्मोपदेशकों की भर्ती होती है। इसलिए पुलिस थानों और चौकियों में धार्मिक स्थल पर प्रतिबंध असंवैधानिक है। इस रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार थानों चौकियों के अलावा जिलों में सरकारी जमीनों पर बने धार्मिक स्थलों का ब्योरा एकत्रित कर रही है।
सभी डीसी से पूछा गया है कि उनके जिलों में कितने धार्मिक स्थल बने हैं, कितने क्षेत्र में हैं, कितने क्षेत्र में निर्माण है, इसकी जानकारी मांगी है। निर्धारित अवधि में यदि सूचना नहीं आती हो खुद ही इसकी जानकारी और रिपोर्ट बनाकर ले जानी होगी। अब जिलों के डीसी की रिपोर्ट के बाद ही राज्य सरकार इस पर फैसला लेगी।
यह था विवाद
पुलिस महानिदेशक रहे मनोज यादव ने अंबाला रेंज के आइजी रहे वाई पूर्ण कुमार से शहजादपुर ट्रैफिक पुलिस थाने में शिवलिंग की स्थापना को लेकर जवाब मांगा था। इसके बाद धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद उभर आया, जिसके बाद मामला बिना अनुमति बने धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया। डीजीपी ने राज्य के सभी एसपी से ब्योरा मांगा तो पता चला कि 200 से अधिक धार्मिक स्थल कब और किसने बनवाए, उसकी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में पुलिस महकमा अफसरों की जिम्मेदारी तय नहीं कर सका, लेकिन जब एडीजीपी ने जांच की, तो उन्होंने इस विवाद पर पुलिस रूल में संशोधन की सिफारिश की। अब राज्य सरकार इन स्थलों को वैध कर सकती है, जिसमें पुलिस थानों के अलावा सरकारी जमीन पर बने अन्य धार्मिक स्थल भी होंगे।

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