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    हरियाणा: अपने अधिकारों के लिए कर्मचारी व मजदूरों ने बुलाया राष्ट्रीय सम्मेलन, दिल्ली में बनेगी आंदोलन की रणनीति

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 04:29 PM (IST)

    केंद्रीय ट्रेड यूनियनें और सरकारी कर्मचारी फेडरेशन सरकार की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करेंगे। 9 जनवरी को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम ...और पढ़ें

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    कर्मचारी व मजदूरों ने तेज किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन। सांकेतिक फोटो

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। देश के मजदूरों की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन और केंद्र एवं राज्य सरकार के कर्मचारियों की अखिल भारतीय फेडरेशन ने सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है।

    आंदोलन का ऐलान करने के लिए नौ जनवरी को नई दिल्ली में कर्मचारियों और मजदूरों का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया है। इस सम्मेलन में काफी संख्या में मजदूर और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के भाग लेने का दावा किया जा रहा है।

    अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि पीएफआरडीए एक्ट रद कर पुरानी पेंशन लागू करने, ठेका संविदा कर्मियों को रेगुलर करने, पीएसयू के निजीकरण पर रोक लगाने तथा खाली पदों पर नियमित भर्ती करने की मांग को लेकर यह आंदोलन हो रहा है।

    इनके अलावा, एनईपी व बिजली अमेंडमेंट बिल पर रोक लगाने, 18 महीने के बकाया डीए डीआर को रिलीज करने की मांग भी की जा रही है। इन मांगों को सरकार की ओर से लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है। नौ जनवरी को हो रहे सम्मेलन में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ, मजदूर संगठन सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस एआइयूटीयूसी संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

    सुभाष लांबा ने अमेरिकी बर्बरता और साम्राज्यवाद के विरोध के कारण वेनेज़ुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी की अमेरिकी सेना द्वारा सीआइए की मदद से की गई गिरफ्तारी की घोर निंदा की और इसे एक संप्रभु गणराज्य पर अमेरिकी साम्राज्यवाद का बर्बर और घृणित हमला बताया है।

    लांबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को 29 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाए चार लेबर कोड्स को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह लेबर कोड्स मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज हैं, जिससे मजदूरों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

    राष्ट्रीय नेता ने कहा कि लेबर कोड्स मजदूरों के यूनियन बनाने, आठ घंटे की ड्यूटी, हड़ताल करने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों पर तीखा हमला हैं। लेबर कोड्स में प्रबंधकों को मजदूरों की छंटनी का अधिकार भी दे दिया गया है।

    इसके साथ ही सरकार ने न्यूक्लियर एनर्जी कानून (शांति) को पारित कर इस क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। इंश्योरेंस क्षेत्र में भी सौ प्रतिशत एफडीआइ को मंजूरी दे दी गई है। मनरेगा को खत्म कर रोजगार की गारंटी को समाप्त करने की चाल चली जा रही है। इससे मजदूरों और कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है।