क्या होता है कलेक्टर रेट? जिस पर जमीन की होती है रजिस्ट्री, हरियाणा में जल्द जारी होंगे नए रेट; बढे़गी कीमत
हरियाणा में नए वित्तीय वर्ष के लिए जमीन के कलेक्टर रेट में 5 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। पुराने रेट 30 मार्च तक मान्य थे। नए रेट जारी होने तक पुरानी दरों पर ही रजिस्ट्रियां होंगी। एनसीआर में जमीन के कलेक्टर रेट सबसे अधिक हैं। पिछले साल जमीन के कलेक्टर रेट 12 से 32 प्रतिशत तक बढ़ाए गए थे।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में नए वित्तीय वर्ष के लिए जमीन के कलेक्टर रेट निर्धारित करने पर काम शुरू हो गया है। नए रेट जारी होने तक पुराने रेट के आधार पर ही रजिस्ट्रियां होंगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को जिलों में नए कलेक्टर रेट तय होने तक पुरानी दरों के आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री करने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
हालांकि, प्रदेश में कलेक्टर रेट को लेकर अधिकतर स्थानों पर असमंजस की स्थिति के कारण मंगलवार को तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्रियों का काम बाधित हुआ है। अधिकतर मामलों में खून के रिश्तों में ही जमीन की रजिस्ट्रियां की गईं, जबकि जमीन हस्तांतरण के अन्य मामलों को नया कलेक्टर रेट तय नहीं होने के कारण टाल दिया गया।
नए कलेक्टर रेट के लिए विभिन्न स्थानों पर पांच से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। पिछले साल पहले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते एक दिसंबर को ही नए कलेक्टर रेट लागू किए जा सके थे।
इसके बाद विभिन्न स्थानों पर पिछले साल एक दिसंबर और विगत एक जनवरी को नए कलेक्टर रेट लागू किए गए, जो 30 मार्च तक मान्य थे। ऐसे में तीन से महीने बाद ही नए सिरे से कलेक्टर रेट को बढ़ाने की तैयारी है। जब तक नए कलेक्टर रेट निर्धारित नहीं होते, तब तक पुराने रेट पर ही जमीन की रजिस्ट्रियां हो सकेंगी।
क्या होता है कलेक्टर रेट
जमीन के कलेक्टर रेट किसी भी जिले में स्थानीय प्रशासन तय करता है। यह अलग-अलग शहर के अलग-अलग इलाकों में जमीन की बाजार कीमत के आधार पर तय किया जाता है।
कलेक्टर रेट किसी भी जिले में जमीन की वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर कोई रियल एस्टेट प्रापर्टी खरीदार को बेची जा सकती है। कलेक्टर रेट समय-समय पर बदलता रहता है, जो स्थान और बाजार के रुझान पर निर्भर करता है।
एनसीआर में सर्वाधिक कलेक्टर रेट
एनसीआर में चूंकि जमीन बहुत अधिक महंगी है, इसलिए वहां कलेक्टर रेट बाकी जिलों से काफी अधिक हैं। पिछले साल जमीन के कलेक्टर रेट 12 से 32 प्रतिशत तक बढ़ाए गए थे।
रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़, सोनीपत, करनाल और पानीपत में 20 प्रतिशत और गुरुग्राम, सोहना, फरीदाबाद, पटौदी और बल्लभगढ़ के कलेक्टर रेट में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई।
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