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    सैन्य सेवा के दौरान बीमारी पर पूर्व सैनिकों को मिलेगी दिव्यांग पेंशन, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:37 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिकों की दिव्यांग पेंशन पर केंद्र सरकार की याचिकाएं खारिज कीं। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के समय स्वस्थ सैनिक को सेवा ...और पढ़ें

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    पूर्व सैनिकों की विकलांगता पेंशन बरकरार

    जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना के पूर्व जवानों की दिव्यांग पेंशन को लेकर एक स्पष्ट आदेश देते हुए केंद्र सरकार के आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

    जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई सैनिक भर्ती के समय चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ पाया गया हो और लंबी सैन्य सेवा के बाद उसमें कोई बीमारी या दिव्यांग सामने आती है, तो कानून यह मानकर चलता है कि वह बीमारी सैन्य सेवा के दौरान ही उत्पन्न हुई है।

    मेडिकल बोर्ड की टिप्पणी काफी नहीं 

    ऐसे मामलों में केवल मेडिकल बोर्ड की औपचारिक टिप्पणी के आधार पर दिव्यांग पेंशन और उसकी राउंडिंग ऑफ के लाभ से इनकार नहीं किया जा सकता। इन सभी याचिकाओं में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Tribunal), चंडीगढ़ द्वारा पारित उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें पूर्व सैनिकों को दिव्यांग पेंशन का लाभ देते हुए 20 या 40 प्रतिशत आंकी गई दिव्यांगता को राउंडिंग ऑफ कर 50 प्रतिशत मानने के निर्देश दिए गए थे।

    अदालत में केंद्र सरकार का तर्क

    केंद्र सरकार का तर्क था कि रिलीज मेडिकल बोर्ड ने संबंधित सैनिकों की बीमारी विशेष रूप से “प्राइमरी हाइपरटेंशन” को न तो सैन्य सेवा से संबंधित माना है और न ही यह माना कि वह सेवा के कारण बढ़ी है। इसी आधार पर सरकार ने दिव्यांग पेंशन और राउंडिंग ऑफ के लाभ को गलत ठहराया।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भर्ती के समय अगर सैनिक पूरी तरह फिट था और सेवा के दौरान बीमारी सामने आई है, तो यह मानने का पूरा कानूनी आधार है कि बीमारी सैन्य सेवा से जुड़ी है।

    सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला 

    अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह सिद्धांत स्पष्ट रूप से स्थापित हो चुका है कि ऐसे मामलों में बीमारी को सैन्य सेवा से असंबंधित साबित करने का भार नियोक्ता यानी सरकार पर होता है।

    मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट तब तक निर्णायक नहीं मानी जा सकती, जब तक उसके समर्थन में ठोस कारण, विस्तृत चिकित्सा रिकार्ड और स्पष्ट विश्लेषण प्रस्तुत न किए जाएं।

    एरियर से संबंधित सभी आपत्ति खारिज

    खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दिव्यांग पेंशन की राउंडिंग ऑफ का लाभ केवल उन सैनिकों तक सीमित नहीं है, जिन्हें सेवा के दौरान अमान्य कर दिया गया हो। सेवानिवृत्त सैनिक भी इसके समान रूप से हकदार हैं, अगर उनकी दिव्यांगता (Disability) सेवा के बाद सामने आई हो।

    इसके साथ ही अदालत ने सरकार की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें एरियर को केवल तीन वर्षों तक सीमित करने की मांग की गई थी।

    न्यायाधिकरण के आदेशों में कानूनी खामी नहीं:HC

    सुप्रीम कोर्ट के बलबीर सिंह फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन एक निरंतर और मूल्यवान अधिकार है और अगर किसी सैनिक को गलत तरीके से इससे वंचित रखा गया है, तो उसे पूरे कालखंड का एरियर मिलना चाहिए।

    अंत में अदालत ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेशों में कोई कानूनी खामी, मनमानी या असंगति नहीं है और केंद्र सरकार यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि उन आदेशों में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता है। परिणामस्वरूप सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।