चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। आपको जानकर ताज्‍जुब होगा कि हरियाणा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अभी तक एक भी व्यक्ति को मकान नहीं मिल पाया है। इसकी बड़ी वजह सब्सिडी का अभाव है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पिछले ढ़ाई साल से हाउसिंग बोर्ड को सब्सिडी का एक रुपया भी नहीं भेजा, जिस कारण करीब 2600 लोगों के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान आवंटित होने से लटके हुए हैं। ये मकान अलग-अलग शहरों में बनकर तैयार हैं।

अब तक मिला किसी को मकान, शहरी निकाय विभाग दबाए बैठा है 2600 मकानों की 65 करोड़ की सब्सिडी

हाउसिंग बोर्ड को सब्सिडी मिलने के बाद इन मकानों के अलाटमेंट लेटर जारी होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जिन मकानों का अलाटमेंट अभी तक नहीं हो पाया है, वह सभी शहरों में हैं। हालांकि कई मकान ऐसे हैं, जिनकी लोकेशन बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन गरीब लोगों के लिए सिर छिपाने का यही बड़ा जरिया बन सकते हैं।

हरियाणा के विभिन्न शहरों में फ्लैट बनकर तैयार मगर सब्सिडी के अभाव में हाउसिंग बोर्ड जारी नहीं कर रहा

अलाटमेंट लेटर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहले आओ-पहले पाओ स्कीम में 1950 लोगों को मकान आवंटित किए जाने हैं। दूसरी स्कीम 75/33 के तहत 711 अर्जियां आई थी, जिनमें से 69 को अपात्र मानते हुए काट दिया गया है। बाकी बचे 642 लोगों की सब्सिडी राशि 16 करोड़ 50 लाख रुपये है। इन 2600 मकानों की कुल सब्सिडी राशि 65 करोड़ रुपये बनती है, जो शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी जारी नहीं कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक मकान पर ढ़ाई लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है। मकान की बाकी कीमत के भुगतान के लिए पात्र व्यक्ति को बैंक से लोन लेने अथवा किसी भी जरिये से खुद भुगतान की सुविधा है। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी पिछले लंबे समय से शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पास से सब्सिडी आने का इंतजार कर रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड की ओर से इसी साल तीन जनवरी 2019 को एक पत्र भी शहरी निकाय विभाग के निदेशक को लिखा गया है, लेकिन सब्सिडी तो दूर, इस बात का जवाब भी आज तक हाउसिंग बोर्ड के पास नहीं पहुंचा है।

आवंटन के अभाव में खंडहर होने जा रहे तैयार मकान

हरियाणा सरकार ने करीब दो लाख गरीब लोगों को मकान देने का लक्ष्य निर्धारित किया था। प्रधानमंत्री आवास योजना का पहला चरण अप्रैल 2015 से मार्च 2017 तक चला। दूसरा फेज अप्रैल 2017 से मार्च 2019 तक चलाया गया और अब तीसरा फेज अप्रैल 2019 से मार्च 2022 तक चल रहा है। पिछले दिनों हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा नगर निगमों ने करीब 2200 घरों के तैयार होने की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी। यह सभी फ्लैट बिल्डरों ने तैयार किए हैं, लेकिन अलाटमेंट के अभाव में अब इन मकानों के खंडहर होने का खतरा बढ़ गया है। इन मकानों का कोई रखरखाव नहीं हो पा रहा है।

55 हजार आवेदनों में से 30 हजार सर्वे के बाद पूरे

हरियाणा शहरी निकाय विभाग के पास नगर निगमों व परिषदों के माध्यम से ढ़ाई से तीन साल में करीब 55 हजार आवेदन आए हैं। इनमें से करीब 30 हजार आवेदन सर्वे के बाद तैयार किए गए हैं, जिन्हें बारी-बारी घर आवंटित किए जाने हैं। तैयार किए गए फ्लैटों में अधिकतर वन और टू बीएचके हैं।

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पहले चरण में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के आवेदकों को घर दिए जाने हैं। मकानों की कुछ कैटेगरी ऐसी है, जो काफी महंगी है। करनाल के सेक्टर 36 में मकानों की लोकेशन काफी दूर है। यहां सफाई का भी कोई बंदोबस्त नहीं किया जा रहा है। लोगों का सुझाव है कि इन मकानों का आवंटन सफाई के बाद यथाशीघ्र किया जाए।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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