नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा कांग्रेस मेें भी मध्‍य प्रदेश का असर पड़ता दिख रहा है। मध्‍य प्रदेश की तरह हरियाणा में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में बड़ा पेंच फंस गया है। हालात यह हैं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में चल रही राजनीतिक हलचल का असर हरियाणा में भी पड़ सकता है। हरियाणा में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं। 90 विधायकों की हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के 31 विधायक हैं और इसी कारण माना जा रहा है कि राज्यसभा की एक सीट पार्टी आसानी से जीत लेगी। लेकिन, टिकट को लेकर हरियाणा कांग्रेस की अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा और पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच मामला फंसता दिख रहा है।

कुमारी सैलजा के साथ ही दीपेंद्र हुड्डा की दावेदारी से हरियाणा कांग्रेस में भी टकराव के हालात

कांग्रेस हाईकमान राज्यसभा की यह सीट दोबारा प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा को देना चाहता है  लेकिन पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमा दीपेंद्र सिंह हुड्डा को यह टिकट चाहता है। उनका कहना है हरियाणा के 31 कांग्रेस विधायकों में से ज्यादातर का समर्थन दीपेंद्र सिंह हुड्डा के पक्ष में है। माना जा रहा है कि इसी कारण पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए इस सीट पर दावा ठोक दिया है।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को अस्थिर कर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। सिंधिया ने पार्टी छोड़ते समय कहा है कि कांग्रेस अब पहले जैसी नहीं रही। यह वाक्य हुड्डा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रोहतक रैली में बोल चुके हैं।

कुमारी सैलजा को दोबारा राज्यसभा में भेजने के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन कर रहा है हुड्डा गुट

फिलहाल हुड्डा की सक्रियता के चलते हरियाणा में भी मध्यप्रदेश जैसे राजनीतिक हालात होने की संभावना जताई जा रही है। हुड्डा ने 9 मार्च को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर दीपेंद्र हुड्डा के लिए राज्यसभा की सीट की मांग की थी। सूत्र बता रहे हैं कि सोनिया ने इस मुलाकात में दीपेंद्र हुड्डा को राज्यसभा सीट देने के लिए साफ इन्‍कार कर दिया था।

इसके बाद मध्यप्रदेश में चली रही उठापठक के चलते हुड्डा ने मंगलवार सायं संदेश भेजकर अपने समर्थक विधायकों को दिल्ली स्थित अपने निजी आवास पर बुलाया। इस बैठक में हालांकि कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्‍नोई, किरण चौधरी सहित तीन अन्य सैलजा समर्थक विधायकों काे आमंत्रित नहीं किया गया। बताया जाता हे कि बैठक में 24 विधायकों पहुंचे। इन विधायकों ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को साफ कर दिया है कि वे दीपेंद्र की दावेदारी के लिए कांग्रेस हाईकमान से भी मिलने को तैयार हैं।

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सैलजा की निश्चित हार को बना रहे हैं दीपेंद्र हुड्डा अपनी दावेदारी का हथियार

राज्य में कांग्रेस के 31 विधायकों में से एक विधायक इस समय बीमारी की हालत में है। इसलिए कुल 30 विधायकों में से यदि भाजपा दो विधायकों को भी क्रॉस वोटिंग या वोट नहीं डालने के लिए तैयार कर लेती है तो राज्यसभा की तीसरी सीट पर भी सत्तारूढ़ दल का कब्जा हो सकता है। इसलिए भूपेंद्र हुड्डा खेमा इस समय कांग्रेस हाईकमान को अपनी राजनीतिक ताकत बता रहा है।

हुड्डा खेमा साफ संदेश दे रहा है कि यदि राज्यसभा की सीट कांग्रेस को जीतनी है तो उम्मीदवारी दीपेंद्र हुड्डा को दी जाए। हुड्डा समर्थकों का कहना है कि दीपेंद्र हुड्डा को महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू सहित सिरसा से निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा भी समर्थन दे देंगे, जबकि सैलजा को उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस के 30 विधायकों की भी गारंटी नहीं ली जा सकती।

31 विधायकों में से सैलजा के समर्थन में तीन विधायकों को ही बताया जाता है, इनमें नारायणगढ़ की शैली चौधरी, कालका से प्रदीप चौधरी और असंध से शमशेर सिंह गोगी शामिल हैं। हुड्डा की बैठक में भी 31 में से 24 विधायक पहुंचे। इन तीन विधायकों के अलावा बिश्‍नोई व किरण चौधरी नहीं पहुंचे। एक विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा बीमारी के चलते बैठक में नहीं आए

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हुड्डा कर रहे हैं दबाव की राजनीति

कांग्रेस हाईकमान की मौजूदा स्थिति देखकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा फिलहाल दबाव की राजनीति कर रहे हैं। हुड्डा यह भी जानते हैं कि बिना उनके समर्थन के कोई अन्य कांग्रेस नेता राज्यसभा सीट नहीं सकता। इतना ही नहीं चूंकि भाजपा की भी इस तीसरी सीट पर नजर है इसलिए हुड्डा खेमा यह भी दावा कर रहा है कि दीपेंद्र हुड्डा के अलावा अन्य कोई उम्मीदवार भाजपा की जोड़तोड़ की राजनीति का सामना नहीं कर सकेगा। हालांकि अभी हुड्डा या सैलजा की तरफ से कोई अधिकृत बयान नहीं आया है।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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