चंडीगढ़, [सुधीर तंवर]। आइएएस से इस्तीफा देने वाली रानी नागर अपनी बहन रीमा के साथ 14 दिन के सेल्फ आइसोलेशन (एकांतवास) में चली गई हैं। इस दौरान वह गाजियाबाद स्थित घर में रहेंगी और किसी के संपर्क में नहीं आएंगी। दूसरी तरफ उनके इस्तीफे पर सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर जहां उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने में जुटे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला व हरियाणा कांग्रेस की प्रधान कुमारी सैलजा ने इसे मुद्दा बनाते हुए हरियाणा सरकार पर जुबानी हमला बोल दिया है। इस सबके बीच रानी नागर के इस्‍तीफे पर तकनीकी पेंच फंसने की संभावना है।

त्यागपत्र में शामिल कुछ बिंदुओं पर फंस सकता तकनीकी पेंच

प्रदेश सरकार ने अभी रानी नागर के इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया है। हरियाणा काडर की 2014 बैच की आइएएस रानी नगर ने  मुख्य सचिव को प्रेषित इस्तीफे में सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा को खतरा बताते हुए त्यागपत्र को तत्काल प्रभाव से यानी कि 4 मई से ही इफेक्टिव (प्रभावी) स्‍वीकृत करने का अनुरोध किया है। त्यागपत्र की प्रति अपने निजी फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर अपलोड करते हुए रानी ने अपनी वीडियो भी डाली है कि कैसे उन्हें चंडीगढ़ से घर जाते समय करनाल के घरौंडा में सरकारी गाड़ी खराब होने से परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस्तीफा मंजूर करने के हक में नहीं हुड्डा और सैलजा, उच्च स्तरीय जांच की मांग

रानी नागर के इस्तीफे की कानूनी पेचीदगी पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि आइएएस से  त्यागपत्र देने की स्थिति में यह उल्लेख होना चाहिए कि इस्तीफा आइएएस की सेवा से दिया जा रहा है न कि किसी पद से। उसे केवल त्यागपत्र देने की तारीख लिखनी होती है और इसके इफेक्टिव (प्रभावी) होने के उल्लेख की जरूरत नहीं होती। जिस दिन सक्षम प्राधिकारी त्यागपत्र को स्वीकार करेंगे, वह उसी दिन से ही प्रभावी माना जाएगा।

त्यागपत्र का कारण भी लिखना अनिवार्य होता है, परंतु रानी नागर ने सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा का कारण लिखा है जबकि उसके स्थान पर सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा को खतरा या भय लिखना अधिक उपयुक्त होता।  उक्त तकनीकी कारणों से उनके त्यागपत्र स्वीकार होने में कोई पेंच फंस सकता है।

इस्तीफा वापस लेने का विकल्प खुला

नियमों के अनुसार आइएएस अधिकारी के त्यागपत्र स्वीकार करने की सक्षम अथॉरिटी केंद्र सरकार के कार्मिक राज्यमंत्री होते हैं। प्रदेश सरकार जांच करती है कि अधिकारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई या जांच लंबित न हो और कोई देनदारी न तो नहीं है। ऐसा न होने पर प्रदेश सरकार अपनी टिप्‍पणी दर्ज कर त्यागपत्र केंद्र को भेज देती है। अगर त्यागपत्र स्वीकार होने से पहले अधिकारी इसे वापस लेने के लिए लिख कर दे देता है तो त्यागपत्र खुद ही वापस लिया माना जाएगा और उसके स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता। केंद्र सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में त्यागपत्र वापस लेने की अनुमति दे सकती है।

हुड्डा-सैलजा ने सुरक्षा पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एक महिला अधिकारी को जिस मजबूरी में इस्तीफा देना पड़ा, वह कई सवाल खड़े करता है। सरकार को उनकी तमाम चिंता और शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए। उनके इस्तीफे को नामंज़ूर करते हुए उन्हेंं वापस सेवाएं देने के लिए आग्रह करना चाहिए। एक महिला अधिकारी ही ख़ुद को असुरक्षित महसूस करेगी तो आम जनता कैसे ख़ुद को सुरक्षित महसूस कर पाएगी।

वहीं, मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कुमारी सैलजा ने कहा कि रानी नागर ने वर्ष 2018 में उत्पीडऩ की लिखित शिकायत की थी। हाल ही में अपनी और बहन की जान को खतरा बताया था, परंतु उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं रानी नागर से बात करें और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएं। सुरजेवाला पहले ही इस तरह की मांग कर चुके हैं।

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