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    गौरक्षक दलों की घरों में घुसकर छापामारी पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, हरियाणा सरकार से मांगा जवाब

    By Kamlesh BhattEdited By:
    Updated: Wed, 05 May 2021 08:15 AM (IST)

    हरियाणा में गौ रक्षक दलों द्वारा लोगों के घरों में छापा मारने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। पूछा कि किस अधिकार के तहत छापामारी हो रही है अगर अधिकार नहीं है तो अवैध छापामारी क्यों हो रही है।

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    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    चंडीगढ़ [दयानंद शर्मा]। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में हरियाणा सरकार से गौ रक्षक दलों द्वारा लोगों के घरों पर छापा मारने के अधिकार पर जवाब तलब किया है। हाई कोर्ट ने कहा निजी व्यक्तियों द्वारा कानून को अपने हाथों में लेकर लोगों के घरों में घुसकर छापेमारी करना कहा तक वैध है।

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    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस सुधीर मित्तल ने यह आदेश हरियाणा के मेवात निवासी मुब्बी उर्फ मुबीन को गौ रक्षा कानून के तहत उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर में जमानत देते हुए दिए हैं। हाई कोर्ट को बताया गया कि मुबीन के खिलाफ दर्ज मामले में आरोप है कि स्थानीय गौ रक्षा दल के अध्यक्ष के नेतृत्व में याचिकाकर्ता के घर पर छापा मारा गया और वहां एक बैल, एक गाय और एक बछड़ा पाया गया।

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    याचिकाकर्ता मौके से भाग गया और उसे पकड़ा नहीं जा सका। दल ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया और 11 मार्च, 2021 को हरियाणा गौवंश संरक्षण और संवर्धन अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस स्टेशन बिछोर, जिला नूंह में एक एफआइआर दर्ज की गई।

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    बहस के दौरान याची के वकील ने कहा कि उपरोक्त अधिनियम की धारा 3 में गोहत्या पर प्रतिबंध है, लेकिन इस मामले किसी भी गाय का वध नहीं है। गौ रक्षा कानून की धारा 8 में बीफ की बिक्री पर रोक है। चूंकि, कोई वध नहीं है, बीफ की बिक्री का कोई सवाल नहीं है और इसलिए आरोप बेबुनियाद है। वकील ने दलील दी कि स्थानीय गौ रक्षा दल और उसके जिला अध्यक्ष को याचिकाकर्ता के घर पर छापा मारने के किसने अधिकृत किया गया था।

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    स्थानीय गौ रक्षा दल इस तरह की कार्रवाई कर खुद कानून के खिलाफ एक अपराधी की तरह काम कर रहे हैं। इस पर हाई कोर्ट ने गौ रक्षा दलों द्वारा नागरिकों के घरों पर छापेमारी करने पर सवाल खड़ा करते हुए सरकार को आदेश दिया कि यह बताइए कि गौ रक्षा दलों को किस अधिकार के तहत छापेमारी की शक्ति दी गई है, अगर नहीं तो यह अवैध छापेमारी क्यों हो रही है।

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