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    हरियाणा में मानसून से पहले सभी ड्रेनों की होगी सफाई, सीएम सैनी ने 637 करोड़ की योजनाएं की मंजूर

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 10:12 AM (IST)

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पहले जलभराव व बाढ़ से निपटने के लिए अधिकारियों को सभी ड्रेनों की समय पर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ...और पढ़ें

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    हरियाणा में मानसून से पहले सभी ड्रेनों की होगी सफाई (File Photo)


    राज्य ब्यूरो, पंचकूला।  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून से पूर्व प्रदेश में जलभराव व बाढ़ की संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिकारियों को सभी ड्रेनों की समय रहते सफाई सुनिश्चित करने को कहा है। यदि किसी परियोजना में देरी या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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    मुख्यमंत्री ने बुधवार को हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 57वीं बैठक में जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मानिटरिंग करें। इस दौरान 637 करोड़ रुपये की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित की गई 102 करोड़ रुपये की 59 योजनाएं भी शामिल हैं।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा के साथ बैठक ले रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 तथा उसके बाद वर्ष 2025 में प्रदेश में जलभराव व बाढ़ की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।

    इनसे सबक लेते हुए अभी से बाढ़ राहत कार्यों की ठोस योजना तैयार कर ड्रेनों की सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जहां भी किसी प्रकार की समस्या हो, वहां तत्काल आवश्यक कार्य करवाएं, क्योंकि अभी पर्याप्त समय उपलब्ध है।

     प्रदेश की तर्ज पर मजबूत स्टोन स्टड बनाए जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के किनारे तटबंधों को मजबूत करने तथा भूमि कटाव रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मजबूत स्टोन स्टड बनाए जाएं। सभी स्टड नई तकनीक से लगाए जाएं ताकि बाढ़ राहत कार्यों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। बजरी से भरे कट्टों को तैयार रखा जाए ताकि जिन स्थानों पर अत्यधिक जल प्रवाह से कटाव की आशंका हो, वहां तुरंत उनका उपयोग किया जा सके।

    उन्होंने यमुना नदी में सीवेज व नालों का प्रदूषित पानी गिरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। किसी भी ड्रेन से यमुना में पानी केवल ट्रीटमेंट के बाद ही छोड़ा जाए।

    इसके लिए सभी आउटफाल प्वाइंट्स को चिन्हित कर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) एवं सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी) के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि अनट्रीटेड पानी यमुना में न जा सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भिवानी-घग्गर ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के कार्य को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

    समीक्षा बैठक का होगा आयोजन

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत से संबंधित उन योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की, जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए तथा जनवरी माह के अंत तक सभी योजनाओं के टेंडर अनिवार्य रूप से लगा दिए जाएं। इस विषय पर जल्द ही एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी।

    ट्रीटेड वाटर के कृषि उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभाग मिलकर ऐसी योजनाएं तैयार करें, जिनके माध्यम से ट्रीटेड पानी खेतों तक पहुंचाया जा सके। ट्रीटेड वाटर का दोबारा उपयोग, चाहे उद्योगों में हो या कृषि में, सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।