क्या हरियाणा में महंगी होगी बिजली? विद्युत विनियामक आयोग करेगा फैसला; पंचकूला में होगी जनसुनवाई
हरियाणा के बिजली निगमों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) को सौंपा है। एचईआरसी 8 जनवरी को पंचकूला में जनसु ...और पढ़ें
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हरियाणा में क्या महंगी होगी बिजली? सांकेतिक फोटो
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली निगमों ने बढ़े खर्चों की दुहाई देकर बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) को दिया है। बिजली दरों को लेकर एचईआरसी आठ जनवरी को पंचकूला स्थित कोर्ट रूम में जनसुनवाई करेगा। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी की मंजूरी दी जाए या नहीं।
लंबे अंतराल के बाद पिछले साल विभिन्न श्रेणियों में बिजली की दरें बढ़ाई गईं थी। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचवीबीएन) तथा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचवीबीएन) की याचिका पर एचईआरसी ने बिजली उपभोक्ताओं से चार जनवरी तक आपत्तियां, सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। संबंधित सभी याचिकाएं आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं।
पिछले साल 28 नवंबर को बिजली वितरण निगमों ने आयोग के समक्ष वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) से संबंधित याचिकाएं दायर की थीं। इनमें वित्त वर्ष 2024-25 का ट्रू-अप भी शामिल है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त वर्ष का आडिट पूर्ण हो चुका है।वित्त वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप के अनुसार दोनों बिजली वितरण निगमों द्वारा कुल 48 हजार 395 करोड़ रुपये के एआरआर की मांग की गई है।
वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दोनों निगमों ने 51 हजार 152 करोड़ रुपये के एआरआर की मांग की है। इसी क्रम में हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम एवं हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम ने भी 26 नवंबर को आयोग के समक्ष अपनी एआरआर याचिकाएं दायर की थीं। इन पर भी आयोग द्वारा चार जनवरी तक आपत्तियां, सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं। इन दोनों निगमों की जनसुनवाई सात जनवरी को आयोजित की जाएगी।
लगातार दो दिन होगी जनसुनवाई
एचईआरसी के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा तथा आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग एवं शिव कुमार के समक्ष सात और आठ जनवरी को बिजली निगमों के अधिकारियों एवं बिजली उपभोक्ताओं की ओर से प्राप्त सभी सुझावों, आपत्तियों एवं टिप्पणियों को रिकार्ड किया जाएगा। आयोग को याचिकाएं दायर किए जाने की तिथि से 120 दिनों के भीतर अपना निर्णय देना अनिवार्य है।

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