चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा के नए मंत्रिमंडल मंं जननायक जनता पार्टी ने अपने कोटे से एक मंत्री बनाया है1 इसको लेकर कई सवाल पैदा हो गए हैं। पूरे मामले में जजपा संयोजक और उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला बेहद सधी चाल चल रहे हैं। मनोहर मंत्रिमंडल में जजपा के एकमात्र मंत्री की एंट्री को पार्टी की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि पेंच जजपा के दो विधायकों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। बताया जाता है कि इन विधायकों को मंत्री बनाने का भाजपा के कुछ दिग्‍गज विरोध कर रहे हैं।

रामकुमार गौतम व देवेंद्र बबली के खिलाफ थे भाजपा के दो दिग्गज

बताया जाता है कि मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर जजपा किसी तरह का उतावलापन नहीं दिखाना चाहती थी। इसलिए कैबिनेट में सिर्फ एक ही मंत्री शामिल कराया गया। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के अलावा हरियाणा कैबिनेट में 12 मंत्री बन सकते हैैं। बृहस्पतिवार को 10 मंत्रियों ने शपथ ली। बाकी बचे दो पदों पर जजपा कोटे के मंत्रियों के अगले कैबिनेट विस्तार में शपथ लेने की संभावना है।

विवादों से बचने के लिए अचानक कराई गई अनूप धानक की एंट्री

आरंभ में चर्चा थी कि बृहस्पतिवार को मनोहर कैबिनेट में जजपा कोटे से दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री शपथ लेंगे। बाद में पार्टी ने रणनीति बदली। खबर आई कि कैबिनेट में जजपा कोटे का कोई मंत्री शामिल नहीं होगा। इस फैसले से पहले डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को 11 विभाग आवंटित हो चुके थे।

कैबिनेट के गठन वाले दिन सुबह के समय चंडीगढ़ स्थित यूटी गेस्ट हाउस में जजपा विधायकों की बैठक हुई, जिमसें दुष्यंत चौटाला भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार जब विधायकों को यह पता चला कि मंत्रिमंडल में जजपा कोटे का कोई मंत्री शामिल नहीं हो रहा है तो दलील दी गई कि इसका प्रदेश में गलत संदेश जाएगा। इसलिए मंत्रिमंडल में जजपा कोटे से किसी विधायक की भी एंट्री जरूरी है।

जजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी पार्टी के विधायकों की इस दलील को वाजिब माना। अब बात आई कि किसे एंट्री दी जाए। नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम, टोहाना से विधायक देवेंद्र बबली और गुहला चीका से विधायक चौधरी ईश्वर सिंह के साथ उकलाना से विधायक अनूप धानक मंत्री बनने के प्रबल दावेदारों में शामिल थे।

बताया जाता है कि पिछली भाजपा सरकार में वित्त मंत्री रह चुके कैप्टन अभिमन्यु और प्रदेश भातपा अध्यक्ष सुभाष बराला नहीं चाहते थे कि गौतम व बबली मंत्री बनें। इसके लिए जबरदस्त लाबिंग की गई। किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अनूप धानक को वफादारी का इनाम देने का निर्णय लिया गया और उन्हें राज्य मंत्री की शपथ दिलाई गई।

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बताया यह भी जाता है कि इस निर्णय से जजपा के कुछ विधायक असहज भी हुए, लेकिन माना जा रहा है कि दुष्यंत चौटाला उन्हें यह समझाने में कामयाब हो गए हैैं कि उचित मौके के हिसाब से सब कुछ ठीक रहता है। सूत्रों के अनुसार बाकी बचे दो मंत्री पद जजपा कोटे के हैैं, लेकिन भाजपा की आखिर तक कोशिश होगी कि दुष्यंत एक मंत्री पद पर राजी हो जाएं, जिसकी संभावना काफी कम है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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