दिग्विजय सिंह ने मोदी-आडवाणी की फोटो दिखा समझाया 'संगठन का पावर', फिर भी हरियाणा में नहीं खड़ा हो पा रहा कांग्रेस संगठन
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की संगठनात्मक मजबूती की नसीहत का हरियाणा में कोई असर नहीं दिख रहा। 11 साल बाद भी हरियाणा कांग्रेस गुटबाजी के कारण जिला व प ...और पढ़ें

दिग्विजय सिंह की नसीहत का हरियाणा में असर नहीं, खड़ा नहीं हो रहा कांग्रेस संगठन। फाइल फोटो
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की नसीहत का हरियाणा में कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले इंटरनेट मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिखाई दे रहे थे।
दिग्विजय सिंह ने इस तस्वीर के साथ लिखा था, 'आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ-बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरण में बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना है, ये संगठन की शक्ति है।' अपनी इस पोस्ट को लेकर दिग्विजय सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया और कहा कि उन्होंने 'संगठन' की तारीफ की है।
दिग्विजय सिंह कांग्रेस में भी कुछ इसी तरह का संगठन चाहते हैं, जिसके बलबूते पर पार्टी के आम कार्यकर्ता को सम्मान, मजबूती और ताकत मिल सके। हरियाणा में कांग्रेस के संगठन को लेकर दिग्विजय सिंह की यह चिंता पूरी तरह से उचित है। राज्य में करीब 11 साल के लंबे अंतराल के बाद पिछले साल सितंबर में कांग्रेस का संगठन बनकर तैयार हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष के पद पर पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति की गई और संगठनात्मक दृष्टि से 32 जिलों में कांग्रेस के जिला प्रधान नियुक्त किए गए। इस संगठन को बने करीब साढ़े तीन माह होने वाले हैं, मगर अभी तक न तो प्रदेश पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा हो सकी और न ही जिलाध्यक्ष अपनी जिला कमेटियों का गठन कर पाए हैं।
कांग्रेस का संगठन नहीं बन पाने की वजह से ही साल 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कांग्रेस हालांकि अपनी हार की वजह वोटों की चोरी बता रही है, लेकिन कांग्रेस का शीर्ष व राज्य स्तरीय नेतृत्व भी जानता है कि यह सच्चाई नहीं है।
सच्चाई कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी और संगठन का अभाव रहा है, जिस वजह से भाजपा को ताकत और कांग्रेस को कमजोरी मिली है। राज्य में कांग्रेस का संगठन नहीं बन पाने की प्रमुख वजह यह है कि पदाधिकारियों के नामों पर नेताओं की आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। जिला कमेटियों में हर गुट अपना वर्चस्व कायम रखना चाहता है, जबकि प्रदेश कमेटी में भी यही स्थिति है।
राज्य में 27 जुलाई 2007 से 10 फरवरी 2014 तक चौधरी फूलचंद मुलाना हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उनके कार्यकाल में प्रदेश कमेटी बनी, लेकिन डॉ. अशोक तंवर के 14 फरवरी 2014 से चार सितंबर 2019 तक के कार्यकाल में संगठन बिल्कुल भी नहीं बन पाया।
इसी तरह, कुमारी सैलजा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चार सितंबर 2019 से 27 अप्रैल 2022 तक के तीन साल के कार्यकाल में भी न तो जिलाध्यक्ष बन पाए और न ही प्रदेश कमेटी का गठन हो पाया।
चौधरी उदयभान 27 अप्रैल 2022 से 29 सितंबर 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे, लेकिन वे भी संगठन नहीं बना पाए। अब राव नरेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन कांग्रेस नेताओं की आपसी गुटबाजी व संगठन पर एकाधिकार रखने की मंशा के चलते वे भी प्रदेश कमेटी का गठन नहीं कर पा रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को दी थी यह सलाह
क्या कांग्रेस के संगठन की क्षमता उन्हें कम दिखाई दे रही है? इस सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा था कि इसमें सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन को सुधार की गुंजाइश रखनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी मूल रूप से एक आंदोलन की पार्टी है, लेकिन अब किसी आंदोलन को वोटों में तब्दील करने में हम कमज़ोर पड़ जाते हैं।
दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लेकर भी इंटरनेट मीडिया पर कहा था कि राहुल गांधी सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ कांग्रेस संगठन पर भी ध्यान दें। कांग्रेस को भी चुनाव आयोग की तरह सुधारों और व्यावहारिक विकेंद्रीकरण की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि राहुल गांधी इस दिशा में क़दम उठाएंगे।
हरियाणा में भाजपा का संगठन मजबूत स्थिति में
हरियाणा में भाजपा का संगठन बहुत ही मजबूत स्थिति में है। भाजपा के दावे के अनुसार करीब 50 लाख लोग पार्टी से जुड़े हैं। पिछले साल के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद से भाजपा ने संगठनात्मक बैठकें चालू कर दी थी। राज्य के हर जिले में भाजपा के बेहतरीन जिला कार्यालय बने हुए हैं, जबकि पंचकूला व रोहतक में राज्य स्तरीय कार्यालय बने हुए हैं।
कांग्रेस राज्य में 10 साल तक सत्ता में रही, लेकिन वह अपने जिला कार्यालय तक नहीं बना पाई। चंडीगढ़ में बना कांग्रेस का राज्य स्तरीय कार्यालय भी सामान्य हालत में है। विभिन्न प्रदेश अध्यक्षों का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए अध्यक्ष के आने के बाद हर बार बजट की कमी को बड़े मुद्दे के रूप में पेश किया जाता रहा है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।