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    'मजदूरों के पैसे खाने वाले कर रहे आंदोलन की नौटंकी', CM नायब सैनी का AAP-कांग्रेस पर बड़ा हमला 

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:49 PM (IST)

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कांग्रेस के मनरेगा आंदोलन को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने कार्यकाल में मनरेगा में भ्रष्टाचार क ...और पढ़ें

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    CM नायब सैनी का AAP-कांग्रेस पर बड़ा हमला। फोटो सीएम एक्स 

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इंडी गठबंधन खासकर कांग्रेस द्वारा मनरेगा के समर्थन में चलाए जाने वाले आंदोलन को सिरे से खारिज किया है।

    उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में मशीनों से काम करवाकर मजदूरों के नाम पर मनरेगा का पैसा खुर्दबुर्द करने वाली कांग्रेस को विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी (वीबी-जी रामजी) योजना में पारदर्शिता व श्रमिकों के हित रास नहीं आ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने वीबी-जी रामजी योजना में मनरेगा के तहत होने वाले समस्त तरह के भ्रष्टाचार, घोटाले और अनियमतिताओं को बंद कर दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। वह नहीं चाहते कि मजदूरों के हिस्से का पैसा उन्हें सीधे उनके खातों में मिले। उन्होंने कहा कि नये प्रविधानों के तहत रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।

    चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव लाकर केंद्र सरकार की वीबी-जी रामजी योजना को अपनाने से पंजाब सरकार मना कर चुकी है।

    देशव्यापी आंदोलन के तहत कांग्रेस हरियाणा में मनरेगा को खत्म करने का आरोप लगाकर आंदोलन करने वाली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का रिश्ता बुआ-फूफड़ की तरह का है। यह दोनों नहीं चाहते कि श्रमिकों को रोजगार मिले।

    वीबी-जी रामजी योजना में मनरेगा की समस्त कमियों व अनियमितताओं को दूर किया गया है। मनरेगा योजना करीब 20 साल पहले आरंभ की गई थी। तब के बाद से इसमें कई बदलाव और समायोजन जरूरी थे, जिन्हें केंद्र की मोदी सरकार ने पूरा किया है।

    नायब सैनी ने कहा कि यूपीए सरकार के पास नीति और नीयत दोनों नहीं थे। उनकी नीयत हमेशा भ्रष्टाचार की रही है। केंद्र में जब से मोदी सरकार आई है, तब से भ्रष्टाचार के सारे रास्ते बंद होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में सीमित रोजगार दिया जाता था, मगर अब जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसरंचना, आजीविका संसाधन व जलवायु परिवर्तन के लिए होने वाले निर्माण कार्य भी वीबी-जी रामजी योजना में शामिल कर लिए गए हैं। इस योजना में काम के ज्यादा दिन सुनिश्चित होंगे। श्रमिकों को समय पर बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तीकरण सुनिश्चित होगा।




    मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी योजना के लिए एक लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। कांग्रेस के समय यह आवंटन मात्र 33 हजार करोड़ रुपये तक ही सीमित था। उन्होंने कहा कि हरियाणा में श्रमिकों व मजदूरों को सबसे अधिक न्यूनतम मजदूरी प्रदान की जा रही है।

    हरियाणा में 400 रुपये न्यूनतम मजदूरी है, जिसके आधार पर संबंधित मजदूर की वार्षिक आय 50 हजार रुपये तक सुनिश्चित होती है। पंजाब में यह मजदूरी 339 रुपये है, जबकि हमाचल प्रदेश में 236 रुपये है। पंजाब सरकार ने अपने राज्य में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की बजाय इस योजना के विरुद्ध विधानसभा में प्रस्ताव पास कर दिया।

    कांग्रेस ने इस योजना के विरोध की रणनीति तो बना ली, लेकिन अपनी राज्य सरकारों को यह निर्देश नहीं दिए कि न्यूनतम मजदूरी हरियाणा के समान कर दी जाए। इससे ही इंडी गठबंधन के दलों की गलत मंशा का पता चलता है।

    सवा पांच हजार करोड़ का भुगतान किया

    नायब सैनी ने दावा किया कि इस साल हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक एससी श्रमिकों व 65 प्रतिशत से ज्यादा महिला श्रमिकों को काम मिला है। हरियाणा में भाजपा ने अक्टूबर 2014 से अक्टूबर 2025 तक श्रमिकों को पांच हजार 243 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

    कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल में केवल एक हजार 854 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। चालू वित्त वर्ष के बजट में भी वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत एक हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रविधान किया गया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि

    मनरेगा के अंतर्गत कई समस्याएं सामने आई। ऐसे में एक पुराने खामियों से भरे ढांचे को बिना सुधार के ढोते रहना न तो श्रमिकों के हित में था और न ही राष्ट्र के हित में है।

    कैग और सोशल आडिट रिपोर्ट ने दिखाया असली आइना

    मुख्यमंत्री ने साल 2013 की कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यूपीए शासन के दौरान योजना में फर्जी लाभार्थियों की भरमार थी। केवल धन की हेराफेरी के उद्देश्य से लाभार्थियों की सूची में अनियमितताएं की जाती थी।

    केंद्र में यूपीए शासन के दौरान मनरेगा एक ऐसी योजना बनकर रह गई थी, जिसका उद्देश्य केवल गड्ढे खोदना और उन्हें भरना था। पंजाब में 13 हजार 304 ग्राम पंचायतों में से केवल 5 हजार 915 ग्राम पंचायतों में किए गए एक सोशल आडिट के अनुसार लगभग 10 हजार 663 वित्तीय गबन के मामले सामने आए।

    इन भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। मनरेगा के तहत अस्वीकृत परियोजनाएं भी मनरेगा निधि से ही चलाई जा रही थी। उनमें कोई निगरानी तंत्र नहीं था और न ही किसी तरह का रिकार्ड रखा जा रहा था। निगरानी के अभाव में मेहनती और योग्य मजदूरों को मिलने वाली उचित मजदूरी छीन ली गई थी।

    नायब सैनी के अनुसार ग्राम पंचायत की योजनाओं को पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान से जोड़ा गया है, ताकि गांव में होने वाला हर काम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो सकें।