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    नए साल के पहले दिन एक्शन में CM सैनी, श्रम विभाग में 1500 करोड़ के घोटाले मामले में उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 09:13 PM (IST)

    मुख्यमंत्री नायब सैनी ने नए साल 2026 के पहले दिन ही श्रम विभाग में उजागर 1500 करोड़ रुपये की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की है। उनके आदेश पर एक उच्चस ...और पढ़ें

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    2026 के पहले दिन नायब सैनी ने श्रम विभाग के 1500 करोड़ के घोटाले पर जांच कमेटी गठित की।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के श्रम विभाग में करीब 1500 करोड़ रुपये के कार्यपर्ची (वर्कस्लिप) घोटाले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कड़ा संज्ञान लिया है। इन कार्यपर्चियों के सत्यापन और श्रमिकों के पंजीकरण से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जो एक माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस जांच कमेटी में दो आईएएस व एक आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।

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    हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने स्वयं ही अपने विभाग में यह घोटाला पकड़ा था और मुख्यमंत्री के समक्ष उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की थी। इन कार्यपर्चियों के आधार पर ही श्रमिकों को श्रम विभाग की सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है।

    Haryana Labor Department

    बताया जाता है कि श्रम मंत्री अनिल विज की ओर से लिखा गया पत्र अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय को नहीं मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री ने मीडिया रिपोर्ट पर कड़ा संज्ञान लिया है। श्रम विभाग द्वारा इस विषय पर एक फाइल प्रस्तुत की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री को सूचित किया गया कि श्रम विभाग ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है और 13 जिलों की रिपोर्ट तैयार है, लेकिन शेष नौ जिलों की रिपोर्ट लंबित हैं। इसलिए शेष जिलों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और अगले ही दिन फाइल वापस भेज दी तथा श्रम मंत्री से सभी जिलों की पूर्ण रिपोर्ट, वित्तीय हानि के सही आंकड़ों समेत प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि, रिपोर्ट अभी तक लंबित है। यह मुद्दा निर्माण श्रमिकों और श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें मिलने वाले लाभों से संबंधित है।

    आरोप लगाया गया है कि जिन कार्यों पर उन्होंने श्रम किया था, वे सही नहीं हैं, इसलिए उनका भवन निर्माण श्रमिक के रूप में दर्ज होना संदिग्ध प्रतीत होता है।

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    आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने आईएएस पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसमें आईएएस राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन को सदस्य बनाया गया है।

    यह समिति पूरे मामले की जांच करेगी और विभिन्न अधिकारियों तथा अन्य लोगों द्वारा की गई अनियमितताओं का पता लगाएगी। इसके अलावा, यह समिति श्रम विभाग को सुधारात्मक या निवारक उपायों की भी सिफारिश करेगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो सके।

    केवल 53,249 वर्कस्लिप वैध, 5 लाख 46 हजार 509 वर्कस्लिप अवैध

    श्रम मंत्री अनिल विज ने बताया कि 13 जिलों करनाल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्कस्लिप जारी की गई थीं, जिनमें से केवल 53 हजार 249 वर्कस्लिप वैध पाई गईं, जबकि 5 लाख 46 हजार 509 वर्कस्लिप अवैध पाई गईं।

    इसी प्रकार, कुल 2 लाख 21 हजार 517 श्रमिकों के पंजीकरण में से सत्यापन के बाद केवल 14 हजार 240 श्रमिक ही पात्र पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 पंजीकरण फर्जी पाए गए।