'गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं', ईडी ने High Court में हुड्डा की जमानत रद्द करने की मांग की; 30 जनवरी को सुनवाई
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य 17 आरोपियों की पंचकूला औद्योगिक प्लॉट आवंटन मामले में जमानत रद्द करने की मांग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने की है। ईडी का आरोप है कि हुड्डा ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई 30 जनवरी तक स्थगित कर दी है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंचकूला के औद्योगिक प्लॉट आवंटन मामले में आरोपित हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) व अन्य 17 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जेल में बंद देखना चाहता है।
इस मामले में ईडी कोर्ट द्वारा हुड्डा व अन्य को दी गई नियमित जमानत रद करने की मांग की गई, जिस पर हाई कोर्ट ने सुनवाई 30 जनवरी तक स्थगित कर दी है।
ईडी ने हुड्डा की जमानत रद्द करने की मांग की
ईडी के वरिष्ठ काउंसिल अरविंद मोदगिल द्वारा दायर याचिका में पंचकूला ईडी कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत हुड्डा को नियमित जमानत दी गई थी। उनके अनुसार, जमानत के लिए तय शर्त की सही अनुपालना नहीं की गई।
हाई कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में ईडी ने हुड्डा व अन्य की जमानत को इस आधार पर रद्द करने की मांग की है कि हुड्डा को जमानत देने का आदेश रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों को अनदेखा कर पारित किया गया है।
गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं हुड्डा- ईडी
ईडी के मुताबिक विशेष अदालत पंचकूला ने आरोपित हुड्डा को जमानत देने में गंभीर त्रुटि की है। केवल इस आधार पर कि वह जांच में शामिल हुए थे और जांच एजेंसी द्वारा पीएमएलए अधिनियम की धारा 19 को लागू कर गिरफ्तार नहीं किया गया, इस पर उन्हें जमानत दे दी गई।
विशेष अदालत इस तथ्य को देखने में विफल रही कि हुड्डा एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। ऐसे में गवाहों व सबूतों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा हुड्डा के भागने की भी आशंका है। इस मामले में ईडी ने हुड्डा, कुछ नौकरशाहों और उन सभी आवंटियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिन्हें हुड्डा के सीएम रहते औद्योगिक भूखंड दिए गए थे।
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जानें क्या है मामला?
यह मामला हरियाणा के पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन से संबंधित है। आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि के बाद पात्रता मानदंड में गलत तरीके से बदलाव किया गया। आरोपों के अनुसार, चेहते आवेदकों को अनुचित लाभ देने के लिए तय नियमों को अनदेखा किया गया।
इस मामले में ईडी की जांच के अनुसार, हुड्डा द्वारा सर्किल दरों/ बाजार भाव के अनुसार भूखंडों की दरें उचित रूप से तय नहीं की गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि मूल्य निर्धारण तंत्र में भी हस्तक्षेप किया गया था।
तत्कालीन मुख्य प्रशासक हुडा डीपीएस नागल ने तत्कालीन वित्त समिति को भंग कर इसे कार्य और खरीद समिति नामक एक अन्य अपेक्षाकृत छोटी समिति के साथ बदल दिया। ईडी जांच से पता चला कि तत्कालीन अध्यक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने अयोग्य आवेदकों को 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया।
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