चंडीगढ़, जेएनएन। यदि बीमा पॉलिसी जारी हुई है और एक्सीडेंट की तिथि को प्रभाव में थी तो प्रीमियम की राशि न भरने की दलील देकर बीमा कंपनी मुआवजे से इनकार नहींं कर सकती है। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने यह  आदेश बीमा कंपनी द्वारा मोटर एक्सीडेंट के एक मामले में दाखिल अपील को खारिज करते हुए दिया।

हाई कोर्ट ने कंपनी की अपील खारिज कर पीडि़त को मुआवजा देने के आदेश किए जारी

याचिका दाखिल करते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि  बीमा कर्ता को एक जीप ने टक्कर मार दी थी। जीप का बीमा करवाने के लिए जीप मालिक ने पैसा और दस्तावेजे एजेंट को सौंप दिए थे और पॉलिसी उस समय प्रभाव में थी, लेकिन एजेंट ने पैसा जमा नहीं करवाया, जिसकी आपराधिक शिकायत भी की गई है।

बीमा कंपनी ने कहा कि जब बीमा की एवज में कंपनी को प्रीमियम की राशि ही प्राप्त नहीं हुई तो उसे मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। लेकिन, हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि एजेंट बीमा कंपनी का था और उसने राशि और दस्तावेज लिए थे। बीमा कंपनी ने पॉलिसी भी जारी की थी जो एक्सीडेंट के समय प्रभाव में थी। अब एजेंट पैसा नहीं जमा कराता है तो यह बीमा कंपनी देखे कि उसे कैसे यह राशि लेनी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि एजेंट की इस गलती का खामियाजा एक्सीडेंट के पीडि़त को भुगतने नहीं दिया जा सकता। एक्सीडेंट 7 मार्च 2013 को हुआ था और पॉलिसी प्रीमियम न मिलने के कारण 15 मई को कैंसल की गई। ऐसे में बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहींं भागसकती और उसे मुआवजे का भुगतान करना ही होगा। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी, वाहन चालक और वाहन मालिक को मिलकर पीडि़त को तीन लाख 11 हजार रुपये 7.5

प्रतिशत ब्याज के साथ सौंपने का आदेश दिया।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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