राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़

हरियाणा के सभी जिला अस्पतालों को सरकार जन्म दोष निगरानी प्रणाली से जोड़ेगी। हरियाणा देश में पहला राज्य है जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के सहयोग से राज्य व्यापी जन्म दोष निगरानी अभियान शुरू किया गया है। जन्म दोष निगरानी पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक इनोशी शर्मा ने यह बात कही।

उन्होंने बताया कि भारत में 1.7 मिलियन बच्चे जन्मजात जन्म दोष (सीबीडी) के साथ पैदा होते है। ये कुल जन्म लेने वाले बच्चों का 6 प्रतिशत है। सीबीडी के कारण प्रतिवर्ष 7700 बच्चों की मृत्यु होती है। सीबीडी के 25 प्रतिशत बच्चों में जन्मजात ह्रदय रोग, न्यूरल टयूब दोष और डाउन सिंड्रोम के मामले शामिल है। जन्म दोष निगरानी (बीडीएस) अस्पतालों में स्थापित कर कठोर जन्मजात विसंगतियों को पहले कुछ दिनों के दौरान पकड़ा जाएगा। इससे बच्चों के जन्म स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी अटलांटा) की टीम ने बताया कि जन्मजात विसंगति के व्यापक कारण होते है। इनकी रोकथाम के उपायों में यौन संचारित संक्रमण की रोकथाम, जहरीले रसायनों का नियंत्रण प्रबंधन आवश्यक है। उप निदेशक बाल स्वास्थ्य हरियाणा डॉ. सुरेश दलपत ने कहा कि जन्म दोष डाटा का विभिन्न स्त्रोतों जैसे एनीमिया ट्रैकिंग मोड्यूल, घर आधारित प्रसवोत्तर देखभाल, विशेष नवजात देखभाल इकाइयों से पता लग रहा है। अभी लगभग एक प्रतिशत नवजात को जन्मदोष रोग निधान के लिए दाखिल किया जाता है।

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