पलवल: रेलवे लाइन पार कॉलोनियों के बीमार पशुओं को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल, कब मिलेगा निदान?
पलवल की रेलवे लाइन पार बसी मोहन नगर, कैलाश नगर, राजीव नगर, ईश्वर नगर और शमशाबाद कॉलोनियों के पशुपालकों को बीमार जानवरों को अनाज मंडी स्थित अस्पताल तक ...और पढ़ें

निवासियों ने स्थानीय पशु अस्पताल की मांग की है, जिस पर विभाग विचार कर रहा है। पशु की फाइल फोटो
अशोक कुमार यादव, पलवल। रेलवे लाइन के पार मोहन नगर, कैलाश नगर, राजीव नगर, ईश्वर नगर और शमशाबाद में रहने वाले पशुपालकों को अनाज मंडी में बने पशु अस्पताल तक पहुंचने के लिए रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है। लाइन पार करना न तो बीमार जानवरों के लिए आसान है और न ही उन्हें लाने वालों के लिए।
गौरतलब है कि शहर की लगभग सभी कॉलोनियों में लोगों ने जानवर पालना बंद कर दिया है। हालांकि, लाइन के पार बसी कॉलोनियों में लोग अभी भी जानवर पाल रहे हैं। ये कॉलोनियां 30 से 35 साल से ज़्यादा पुरानी हैं। एक अनुमान के मुताबिक, लाइन के पार बसी कॉलोनियों में तीन से चार हजार से ज्यादा दुधारू जानवर पाले जाते हैं।
इतनी बड़ी संख्या में जानवर होने के बावजूद, लाइन के पार एक डिस्पेंसरी तो दूर, पशु अस्पताल भी नहीं बनाया गया है। इसलिए, अगर इन कॉलोनियों के जानवर बीमार पड़ते हैं, तो उन्हें इलाज के लिए रेलवे लाइन पार करके लाना पड़ता है।
स्थानीय निवासी हरबीर सिंह, राहुल पांचाल, चरण सिंह, हरेराम और राम आसरे ने बताया कि इन कॉलोनियों में ज़्यादातर मज़दूर वर्ग के लोग रहते हैं। लाइन पार अनाज मंडी में बने पशु अस्पताल या कैंप तक बीमार जानवरों को ले जाने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। अलीगढ़ और अलावलपुर रोड पर ROB के ऊपर से जानवरों को ले जाना बहुत खतरनाक है। गाड़ियों के शोर से जानवर बेकाबू हो सकते हैं, जिससे जान-माल का खतरा हो सकता है। इसलिए, पशु अस्पताल तक पहुँचने के लिए रेलवे लाइन पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
महंगा होता है प्राइवेट डॉक्टर से इलाज
घर पर प्राइवेट पशु डॉक्टर को बुलाना बहुत महंगा पड़ता है। कभी-कभी, ट्रैफिक जाम और दूसरी समस्याओं से बचने के लिए डॉक्टर आने से मना कर देते हैं। घरों में बीमार जानवरों को बांधने और इलाज करने के लिए उचित रस्सियाँ नहीं होती हैं, जिससे चोट लग जाती है।
कॉलोनियों की संकरी गलियों के कारण सरकारी पशु एम्बुलेंस वहाँ तक नहीं पहुंच पाती हैं। समय पर और सही इलाज न मिलने के कारण अक्सर जानवरों की मौत हो जाती है, जिससे गरीब लोगों को बहुत परेशानी होती है। इस इलाके में एक पशु अस्पताल होना चाहिए ताकि पालतू जानवरों के मालिकों को अपने पालतू जानवरों का समय पर इलाज मिल सके। -आचार्य राम कुमार बघेल
अगर जानवर बीमार पड़ते हैं, तो प्राइवेट डॉक्टरों को बुलाना पड़ता है। इससे इलाज महंगा हो जाता है। इलाज अक्सर सही नहीं होता। रेलवे लाइन के किनारे बसी कॉलोनियों में भी जानवरों के लिए एक सरकारी अस्पताल बनाया जाना चाहिए। -सुरेश कुमार
रेलवे मंत्रालय ने कॉलोनियों से रेलवे लाइन पार करने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। जानवरों को पैदल पुल से ले जाने में डर लगता है। उन्हें प्राइवेट डॉक्टरों के पास ले जाना पड़ता है। यहाँ एक अस्पताल बनाया जाना चाहिए। -विजयपाल
रेलवे लाइन के किनारे बनी कॉलोनियों में बीस हज़ार से ज़्यादा लोग रहते हैं। इन कॉलोनियों के कई घरों में जानवर पाले जाते हैं। इसलिए, एक पशु अस्पताल जरूरी है। -कौशल
इस बारे में पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर, वीरेंद्र राठी का कहना है कि इन कॉलोनियों में हाल ही में जानवरों की गिनती की गई है। अगर इन कॉलोनियों में तीन हजार से ज्यादा जानवर होंगे, तो वहां एक डिस्पेंसरी बनाई जाएगी।

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