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    मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना में 75 लाख का हुआ था गबन, दोषी पाए जाने के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 01:23 AM (IST)

    नूंह के पिनगवां सीएचसी में मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत 75 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। जांच कमेटी ने तत्कालीन एसएमओ गगन खटाना, फार् ...और पढ़ें

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    मोहम्मद मुस्तफा, नूंह। प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार को मुक्त करने का दावा करती हो, लेकिन अभी भी सरकार में ऐसे कर्मचारी व अधिकारी मौजूद हैं, जो विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसा ही मामला पिनगवां सीएचसी से सामने आया है। इसमें मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के नाम पर सरकार द्वारा दवाइयों के लिए दी गई 75 लाख रुपये की राशि को खुर्द बुर्द किया गया।

    मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए कमेटी गठित कर करीब छह महीने तक जांच की गई लेकिन कमेटी द्वारा मामले को टालते हुए दबाने का काफी प्रयास किया गया। आखिरकार गठित कमेटी ने अपनी जांच में तत्कालीन एसएमओ गगन खटाना, यूसुफ फार्मेसिस्ट और प्रेमसिंह लेखा सहायक को जांच में दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन मांडीखेड़ा को सौंपी।

    नियमानुसार भ्रष्टाचार में संलिप्त डाॅक्टरों पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट को पंचकूला भेजा गया। जहां पर करीब एक साल बीत जाने के बाद भी दोषियों की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। आरोप है कि दोषियों द्वारा वहां पर बैठे अधिकारियों से सांठगांठ की हुई है, जिसके कारण कार्रवाई सिरे नहीं चढ़ पा रही है। इसमें पंचकूला बैठे बाबुओं की मिलीभगत भी बताई जा रही है।

    बता दें कि पिनगवां सीएचसी में मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के नाम पर करीब दो साल पहले सरकार द्वारा दवा खरीदने के लिए 75 लाख रुपये का बजट दिया गया। जिसे तत्कालीन एसएमओ गगन खटाना, फार्मसिस्ट यूसुफ और प्रेमसिंह लेखा सहायक ने दवा खरीदने के बजाए खुर्द बुर्द कर दिया। मामले से पर्दा तब उठा जब पिनगवां सीएचसी में दवा नहीं मिलने पर क्षेत्र के लोग बैरंग लौटने लगे।

    इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने शिकायत के साथ साथ आरटीआई से भी जवाब मांगा। जिसमें दवाईयों के बजट गबन मामले की तस्वीर साफ हो गई। इसके बाद सीएमओ द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। जो कई महीने तक मामले में लीपा पोती करती रही, लेकिन जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा तो कमेटी को जांच पूरी करनी पड़ी। जिसमें उक्त तीनों कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया। लेकिन आगे की कार्रवाई पंचकूला से ठंडे बस्ते में डाली हुई है।

    दोषियों को बचा रहा विभाग

    सरकार की आंखों में धूल झोंककर दवाईयों की राशि को खुर्द बुर्द करने वाले दोषियों को नूंह जिले के स्वास्थ्य विभाग से लेकर पंचकूला तक के अधिकारी बचाने में लगे हुए हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होना अधिकारियों पर सवाल खड़ा करती है।

    गहनता से जांच होने पर कई डाॅक्टरों पर गिर सकती है गाज: लोगों का कहना है कि गबन के मामले में यदि सरकार गहनता से मामले की जांच कराए तो इस मामले में कई अन्य डाक्टरों पर भी गाज गिर सकती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के बजाए उल्टा मामले को दबाने में लगा हुआ है।

    कमेटी द्वारा दोषी पाए जाने वाले स्टाफ की रिपोर्ट को पंचकूला भेजा हुआ है। वहां से आगे की कार्रवाई की जाएगी। हमारी तरफ से जांच रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए भेजा हुआ है।

    -डाॅक्टर सर्वजीत थापर, सिविल सर्जन नूंह

    इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से पता किया जाएगा कि कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। जो भी दोषी हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी।

    -अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त नूंह

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