विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी से बजेंगी शहनाइयां, जानिए कब-कब हैं शुभ मुहूर्त

Published: Thu, 30 Oct 2025 03:22 PM (IST)

देवउठनी एकादशी हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. देवउठनी एकादशी: शुभ कार्यों का आरंभ

  2. भगवान विष्णु योग निद्रा से जागेंगे

  3. दो नवंबर से शूरू होंगे मांगलिक कार्य

जागरण संवाददाता, नारनौल। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी गई है। इसी दिन भगवान विष्णु 4 महीनों की योग निद्रा से जागते है। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है।

इस दिन से सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि फिर से शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन साधक भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते है। तथा व्रत का पालन करते हैं। इसके साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है।

आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि एक नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो रही है तथा दो नवंबर को सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत गृहस्थ लोग एक नवंबर को रख सकते है।

वैष्णव संप्रदाय के लोग दो नवंबर को रखेंगे। इस दिन से विवाह कार्य शुरू हो जाएंगे, जो कि विवाह कार्य 14 दिसंबर तक चलेंगे। 14 दिसंबर को शुक्रास्त होने के कारण विवाह आदि शुभ कार्य के मुहूर्त बंद हो जाएंगे।