कुरुक्षेत्र [विनीश गौड़]। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस से लड़ने की इम्युनिटी बढ़ाने वाला फार्मूला तैयार किया है। विश्वविद्यालय कोविड-19 से बचाव करने वाले योगासन का ऑनलाइन अभ्यास कराएगा। जिनके नियमित अभ्यास से लोग कोरोना वायरस से बचाव की इम्युनिटी डेवलप कर पाएंगे। विश्वविद्यालय ने इसके लिए ऑनलाइन सीरिज शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है।

योगाचार्य योगेंद्र ऑनलाइन वीडियो के जरिए लोगों को इस कवच को तैयार करने का अभ्यास कराएंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव ने बताया कि विश्वविद्यालय योगाभ्यास की इस ऑनलाइन सीरिज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए काम भी करेगा। कई तरह के वायरस हमारे आसपास रहते हैं मगर हमारे शरीर की इम्युनिटी उन्हें एक्टिव होने नहीं देती। कोरोना वायरस को एक्टिव होने से रोकने के लिए इम्युनिटी बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए योगासन व प्राणायाम सबसे सटीक माध्यम हैं।

ये आसन होंगे पहली सीरिज में

सर्वांगसन, भुजंगासन, त्रिकोणासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, सूर्य नमस्कार, चंद्रभेदी प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, कपालभाती ये सब आसन पहली सीरिज में शामिल होंगे। इन आसन और प्राणायाम के माध्यम से फेफड़ों की क्षमता तो बढ़ेगी ही साथ ही रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी।

चंद्रभेदी प्राणायाम की विधि

पहले किसी सुखासन में बैठ जाएं। अपने दाहिने हाथ से प्राणायाम मुद्रा बनाएं अंगूठे से दाई नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से श्वास को अंदर ले श्वास को अंदर लेना पूरक कहलाता है। अंदर ली हुई सांस को सांस लेने के समय से दोगुना समय रोक कर रखना होता है। इस प्रक्रिया को कुंभक भी कहा जाता है और अब रुकी हुई सांस को दाई नासिका से बाहर निकाल देते हैं। इसे चंद्रभेदी प्राणायाम कहा जाता है। यह श्वसन तंत्र को स्वस्थ करता है। इसके अलावा अनुलोम-विलोम और कपालभाती के बारे में ज्यादातर लोग जानते ही हैं।

योग व प्राणायाम बनाएगा सुरक्षा कवच : डॉ. बलदेव

आयुष विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. बलदेव ने बताया कि किसी भी बीमारी से लडऩे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता एक कवच का काम करती है। इस कवच को योगासन और प्राणायाम और ज्यादा मजबूत कर सकता है। इसी दृष्टिकोण के साथ विश्वविद्यालय ने एक कोविड-19 से योग का सुरक्षा कवच कार्यक्रम बनाया है, जिससे घर बैठे लोगों तक कुछ योग व प्राणायाम की सही प्रक्रिया को पहुंचाया जाएगा। पहली सीरिज में इम्युनिटी एंड योगासन, इम्युनिटी एंड प्राणायाम, इम्युनिटी एंड मुद्राज, इम्युनिटी एंड क्रिया को रखा गया है।

कोविड-19 के मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाओं के अच्छे परिणाम आने के बाद ही यह निर्णय लिया गया। दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां जिस बीमारी की अब तक कोई दवा नहीं खोज पाई उसके प्रभाव को आयुर्वेदिक दवाएं कम कर पा रही हैं। यही वजह रही कि प्रदेश में विश्वविद्यालय की ओर से कोविड-19 के 105 मरीजों का उपचार एलोपैथिक दवा के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवा से भी किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। ज्यादातर मरीजों का कोरोना टेस्ट सैंपल पहले दिन में ही नेगेटिव आया है।

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