हरियाणा में प्राइवेट अस्पताल का बड़ा फर्जीवाड़ा, मृत पुलिसकर्मी के नाम पर बनाया 22 लाख का बिल
सोनीपत के हरियाणा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल ने मृत सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर सुरेश कुमार के इलाज के 22 लाख रुपये का बिल लेने के लिए उनकी मृत्यु के तीन ...और पढ़ें

दिसंबर में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की मौत, अस्पताल ने 22 लाख का बिल लेने के लिए लगा दिया मार्च में बना फर्जी शपथ पत्र।
जागरण संवाददाता, कैथल। इलाज का भारी भरकम बिल लेने के लिए सोनीपत के निजी अस्पताल का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पुलिस से सेवानिवृत्त हो चुके सब इंस्पेक्टर के इलाज के 22 लाख रुपये लेने के लिए मौत के तीन महीने बाद उसी का फर्जी शपथ पत्र लगा दिया गया। सेवानिवृत्त एसआई की मौत दिसंबर 2024 में हो गई थी, जबकि मार्च 2025 का शपथपत्र लगा बिल कैश कराने को प्रयास किया।
22 लाख रुपये का बिल बनने पर कैथल पुलिस विभाग में कार्यरत संदीप ढुल फार्मासिस्ट ने जांच की और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। सोनीपत के कलावती विहार के रहने वाले राहुल की शिकायत पर विवेकानंद चौक सोनीपत स्थित हरियाणा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल संचालक के विरुद्ध सिविल लाइन थाना में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
शिकायत में राहुल ने बताया कि उसके पिता सुरेश कुमार अप्रैल 2021 में कैथल से सब इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह शुगर की बीमारी से पीड़ित थे। 18 सितंबर 2024 को उसके इलाज के लिए हरियाणा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से 13 अक्टूबर को उसके पिता को छुट्टी मिल गई थी। सरकार के नियमानुसार उन्होंने कैशलेस योजना में इलाज कराया था।
30 नवंबर को दोबारा से उसके पिता को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था और तीन दिसंबर 2024 को उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। 11 दिसंबर को पिता की मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने अस्पताल वालों को किसी भी प्रकार का शपथपत्र देने से मना कर दिया था। अस्पताल के सदस्य उनके घर भी आए थे, लेकिन उन्होंने कोई शपथपत्र नहीं दिया था।
दिया गया ज्यादा राशि का बिल
अस्पताल की तरफ से करीब 22 लाख रुपये का बिल बनाया गया था। बिल की फाइल पुलिस विभाग कैथल के फार्मासिस्ट संदीप ढुल के पास आई थी। संदीप को शपथपत्र संदिग्ध लगा तो राहुल को फोन कर कार्यालय बुलाया गया। वहां जाकर शपथपत्र चेक किया तो उस पर उसके पिता के हस्ताक्षर थे।
यह शपथपत्र मार्च 2025 में अस्पताल की तरफ बनवाया गया था। सिविल लाइन थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच एसआई कुलदीप को सौंप दी है।
बिल क्लेम की फाइल जमा कराने के लिए शपथपत्र बनवाने की जिम्मेदारी अस्पताल के एक कर्मचारी की लगाई गई थी। वह कर्मचारी मरीज के घर गया था, वहां कोई नहीं मिलने के कारण कर्मचारी ने खुद मरीज के साइन कर शपथपत्र लगा दिया। मामला मेरे संज्ञान में आने के बाद उस कर्मचारी को प्रबंधन ने नौकरी से निकाल दिया था। कर्मचारी की गलती से ऐसा हुआ था। पुलिस के सामने भी कर्मचारी ने अपनी गलती स्वीकार की थी। - रामनिवास राणा, संचालक, हरियाणा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल, सोनीपत।

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