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    झज्जर में गोवंश बचाने के चक्कर में डिवाइडर से टकराई कार, हादसे में पूर्व सैनिक की मौत

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 02:57 PM (IST)

    झज्जर के चरखी दादरी रोड बाईपास चौक पर बेसहारा गोवंश को बचाने के प्रयास में एक कार डिवाइडर से टकरा गई, जिससे पूर्व सैनिक मनीष की मौत हो गई। बिसाहन गांव ...और पढ़ें

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    बेसहारा गोवंश बन रहे हादसों का सबब, हादसों पर भारी पड़ रही अनदेखी (फोटो: जागरण)

    जागरण संवाददाता, झज्जर। शहर और ग्रामीण इलाकों में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश अब केवल अव्यवस्था का कारण नहीं, बल्कि जानलेवा समस्या बनते जा रहे हैं। चरखी ददरी रोड बाईपास चौक पर रविवार देर रात ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां गोवंश को बचाने के प्रयास में एक कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में कार चालक, पूर्व सैनिक मनीष की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर बेसहारा गोवंश की समस्या और बरती जा रही लापरवाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिसाहन गांव निवासी मनीष पुत्र बलवीर सेना से सेवानिवृत्त था और रात के समय कार से अपने घर लौट रहा था। जब वह झज्जर के चरखी ददरी बाईपास चौक पर फ्लाईओवर के पास पहुंते, तभी अचानक से सड़क पर गोवंश आ गया। गोवंश को बचाने के चक्कर में चालक का गाड़ी से संतुलन बिगड़ गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में मनीष गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत सामान्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक के भाई मनजीत ने बताया कि मनीष एक बच्चे का पिता था और परिवार का सहारा था। उसके पिता भी सेवा से सेवानिवृत्त हैं। अचानक हुए इस हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, मुआयना किया और शव को कब्जे में लेकर सामान्य अस्पताल पहुंचाया।

    सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया गया। शहर थाना प्रभारी बलदेव सिंह ने बताया कि यह एक इत्तिफाकिया हादसा है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया है। यह हादसा कोई पहला मामला नहीं है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों पर बेसहारा गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    विशेषकर बाईपास, हाईवे और संपर्क मार्गों पर रात के समय अचानक सामने आ जाने वाले पशु वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। जबकि, कोहरे के दिनों में तो दिक्कत और ज्यादा गंभीर हो जाती है।

    शहरी और ग्रामीण इलाकों में बेसहारा गोवंशों की लगातार बढ़ती संख्या अब आमजन और किसानों दोनों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। एक ओर जहां खेतों में घुसकर ये गोवंश सरसों और गेहूं की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सर्दियों के मौसम में धुंध और घने कोहरे के बीच सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु हादसों का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। किसान रात-रात भर खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं और वाहन चालक हर सफर को जोखिम भरा मान रहे हैं। कई बार तो पशु अचानक सामने आ जाते हैं और संभलने का मौका तक नहीं मिलता।

    शहरवासियों में रामकिशन, पूर्व सैनिक रामसिंह, नरेंद्र कुमार, सुरेंद्र सुहाग, राजेंद्र सिंह और प्रेम सिंह ने बताया कि कुछ वर्ष पहले नगर परिषद द्वारा बेसहारा गोवंशों के गले में रिफ्लेक्टर टेप लगाए जाते थे। इससे रात और कोहरे में भी दूर से पशुओं की मौजूदगी का पता चल जाता था और हादसों में काफी कमी आई थी। अधिकांश बेसहारा गोवंश बिना किसी रिफ्लेक्टर के सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे वाहन चालकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।