झज्जर में अव्यवस्थित विकास ने किया शहर को बेहाल, सड़क सीवरेज और मलबे से बढ़ी परेशानी; नागरिक परेशान
झज्जर शहर में अनियोजित विकास कार्यों के कारण नागरिक और कारोबारी दोनों परेशान हैं। टूटी सड़कें, बहता सीवरेज और जगह-जगह मलबे के ढेर से जनजीवन अस्त-व्यस् ...और पढ़ें

झज्जर शहर में अनियोजित विकास कार्यों के कारण सड़कें टूटी हैं (फोटो: जागरण)
जागरण संवाददाता, झज्जर। शहर के विकास को लेकर विभागीय दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर इन दिनों साफ तौर पर नजर आ रहा है। झज्जर शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे अनियोजित विकास कार्य न केवल आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं, बल्कि कारोबारियों के सामने भी रोजगार और व्यापार को बचाए रखने की चुनौती खड़ी कर रहे हैं।
हालात ऐसे हैं कि रिहायशी क्षेत्रों में बसे बाजारों तक पहुंचना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है, वहीं दुकानदार ग्राहकों की बाट जोहते नजर आते हैं। ढाई किलोमीटर के सीमित दायरे में बसे झज्जर शहर में प्लानिंग की कमी अब खुलकर सामने आ रही है। पोस्ट आफिस चौक से आंबेडकर चौक, रविंद्र छिक्कारा चौक से बीकानेर चौक, सिलानी गेट एरिया समेत कई प्रमुख हिस्सों में सड़कें टूटी पड़ी हैं, सीवरेज का पानी सड़कों पर बह रहा है और जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में न पैदल चलना आसान है और न ही दोपहिया या चारपहिया वाहन निकालना।
शहर के बाजार रिहायशी इलाकों के बीच बसे हुए हैं। पहले जहां सुबह से शाम तक चहल-पहल रहती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा रहता है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक गंदगी, बदहाल सड़कों और सीवरेज के पानी से बचने के लिए बाजार आना ही नहीं चाहते। कई दुकानों पर बिक्री आधी से भी कम रह गई है, जिससे छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
पोस्ट आफिस चौक से व्यापारी यशपाल बत्रा ने बताया कि पिछले कई हफ्तों से सड़क खुदी हुई है। मलबा उठाने की कोई समय-सीमा तय नहीं है। ग्राहक वाहन लेकर आते हैं, लेकिन बीच रास्ते से ही लौट जाते हैं। यही स्थिति आंबेडकर चौक और सिलानी गेट क्षेत्र की भी है, जहां सड़क और सीवरेज की समस्याएं एक साथ लोगों को झेलनी पड़ रही हैं।
सिर्फ व्यापारी ही नहीं, आम नागरिकों के लिए भी घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई इलाकों में घर की चौखट से लेकर सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें देने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। कहीं सड़क बन रही है तो सीवरेज खुला छोड़ दिया गया है, और कहीं सीवरेज ठीक करने के नाम पर सड़क को फिर से तोड़ दिया गया। विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ रहा है।
शहर में चल रहे अधिकांश कार्य ठेकेदारों के भरोसे हैं, लेकिन उन पर किसी तरह की सख्त निगरानी नजर नहीं आ रही। मलबा समय पर नहीं उठाया जा रहा, अधूरे काम लंबे समय तक लटके रहते हैं और शिकायतों के बावजूद ठेकेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि अगर विभाग समय-समय पर निरीक्षण करें और ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो, तो हालात इतने खराब न हों। फिलहाल स्थिति यह है कि एक समस्या का समाधान शुरू होता है, उससे पहले दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है।
हरियाणा व्यापार मंडल के जिला प्रधान केशव सिंघल ने कहा कि कुछ क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा खराब है। निश्चित ही शहर में विकास जरूरी है, लेकिन बिना योजना के किया गया कार्य व्यापार और जनजीवन दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है।
रिहायशी इलाकों में बसे बाजारों तक अगर ग्राहक ही नहीं पहुंच पाएंगे, तो व्यापारी कैसे टिक पाएंगे। अब विभागों को चाहिए कि स्पष्ट प्लानिंग हो, समय-सीमा तय की जाए और ठेकेदारों पर सख्ती बरती जाए। साथ ही, प्रमुख बाजार क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सड़क, सीवरेज और साफ-सफाई के कार्य पूरे किए जाएं, ताकि कारोबार को फिर से गति मिल सके।

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