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    जरूरत से ज्यादा खुश होना भी आपको कर सकता है बीमार, जाने... क्या कहते हैं डॉक्टर

    By Kamlesh BhattEdited By:
    Updated: Fri, 06 Apr 2018 05:25 PM (IST)

    ज्यादा खुशी, कम सोना और ज्यादा भूख लगने से आपको मेनिया रोग हो सकता है। गर्मियों के मौसम में युवाओं में सिरोटोनिन नामक हार्मोन बढ़ने से विचारों में बदलाव आते हैं।

    जरूरत से ज्यादा खुश होना भी आपको कर सकता है बीमार, जाने... क्या कहते हैं डॉक्टर

    हिसार [चेतन वर्मा]। अगर आप जरूरत से ज्यादा खुश होते हैं और कम नींद लेने के साथ खाना ज्यादा खाते हैं तो आप मेनिया रोग से ग्रस्त हो सकते हैं। वजह है गर्मी बढऩे के साथ-साथ हार्मोन में बदलाव होना। अप्रैल से अगस्त तक इस बीमारी का प्रभाव अधिक रहता है। यह 20 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को अपनी चपेट में लेती है।

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    चिकित्सकों के अनुसार अप्रैल से लेकर अगस्त तक गर्मी के मौसम में मस्तिष्क के अंदर सिरोटोनिन नामक हार्मोन तेजी से बढऩे लगता है, जबकि दूसरे हार्मोन में कमी आने लगती है। फलस्वरूप, मरीज शरीर के अंदर जरूरत से अधिक ताकत महसूस करने लगता है, जिससे उसके मन में हमेशा घूमने-फिरने की इच्छा जागृत होती रहती है। साथ ही मरीज जरूरत से ज्यादा खुश भी रहने लगता है और दूसरों को भी खुश करने के लिए तरीके खोजता रहता है। यहीं नहीं, अगर मेनिया रोग से ग्रस्त मरीज की बात न मानी जाए तो वह दूसरों से झगड़ा करने से परहेज नहीं करता। इतना ही नहीं, मरीज घर छोड़कर भाग भी जाता है।

    यह होता है मेनिया रोग

    गर्मी के मौसम में शरीर के अंदर कई बदलाव आते हैं, जिनमें हार्माेन मुख्य तौर पर तेजी से बदलते रहते हैं। शरीर के अंदर सिरोटोनिन नामक हार्माेन की मात्रा तेजी से बढ़ती है और उसका प्रभाव मस्तिष्क तक चला जाता है। इस कारण मस्तिष्क का शरीर पर अधिकांश कंट्रोल हट जाता है। हार्माेन की मात्रा बढऩे से मरीज के व्यवहार में तेजी से बदलाव आने लगता है, जिस कारण मरीज बड़ी-बड़ी बात करने लगता है। साथ ही वह खुद को जरूरत से ज्यादा ताकतवर भी महसूस करने लगता है।

    ये होते हैं लक्षण

    • मरीज जरूरत से अधिक खुश रहने लगता है।
    • भूख अधिक लगने लगती है।
    • घूमने-फिरने में अधिक चाव रखने लगता है।
    • मन में तेजी से विचार पनपते रहते हैं।

    ये होते हैं नुकसान

    • मेनिया रोग से ग्रस्त मरीज दूसरों को खुश रखने के लिए पैसे वहन करने में विश्वास रखने लगता है।
    • अगर परिजन मरीज की कोई भी बात न माने, तो वह झगड़ा कर बैठता है।
    • मस्तिष्क में तनाव ज्यादा हो तो सुसाइड करने से भी परहेज नहीं करता।
    • मेनिया रोग की समय से पहचान नहीं हुई तो मस्तिष्क का शरीर पर नियंत्रण धीरे-धीरे खोने लगता है
    • घूमने-फिरने की चाह में बार-बार घर से भागता रहता है, जिस कारण मरीज के पैरों में छाले तक पड़ जाते हैं।

    पिछले साल आए थे 60 मरीज

    पिछले वर्ष भी मेनिया रोग से ग्रस्त 60 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आए थे, जिनका मनोचिकित्सक द्वाराइलाज किया जा रहा है। मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक होती है। क्योंकि गर्मियों में युवा अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग नहीं रहते, जिस कारण उनको मेनिया रोग होने का खतरा अधिक बना रहता है।

    ऐसे करें बचाव

    • युवाओं के व्यवहार पर नजर बनाए रखें।
    • संदेह होने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
    •  संतुलित और पौष्टिक भोजन का ही सेवन करें।
    •  सुबह उठकर सैर व व्यायाम करना न भूलें।
    •  हर माह दो बार मनोचिकित्सक से बच्चे की काउंसिलिंग करवाते रहें।

    15 से 20 दिनों में दवाइयों के कोर्स से इसका इलाज संभव

    मनोचिकित्सक विनोद डूडी का कहना है कि गर्मियों के मौसम में युवाओं को मेनिया रोग घेर लेता है। घबराने की जरूरत नहीं है। पहली स्टेज पर 15 से 20 दिनों में दवाइयों के कोर्स से इसका इलाज संभव है। मगर लापरवाही बरतने पर एक साल या उससे अधिक समय तक दवाओं का कोर्स चलता रहता है।

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