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    Hisar News: पिता की परचून की दुकान, बेटा बना जज

    By Jagran NewsEdited By: Himani Sharma
    Updated: Mon, 16 Jan 2023 09:23 AM (IST)

    हरियाणा के हिसार स्थित मंडी आदमपुर में परचून की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार का बेटा जज बन गया। दुकानदार सुनील कुमार के बेटे जतिन मित्‍तल का चयन उत्‍त ...और पढ़ें

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    पिता की परचून की दुकान, बेटा बना जज

    मंडी आदमपुर : लिखे जाते हैं मेहनत की स्याही से जिनके इरादे, नहीं होते हैं कभी खाली पन्ने उनकी किस्मत में। आदमपुर में परचून की दुकान चला रहे दुकानदार सुनील कुमार के छोटे बेटे जतिन मित्तल का चयन उत्तराखंड में सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्टेट के रूप में हुआ है। जतिन मित्तल के जज बनने की सूचना मिलने पर आदमपुर में खुशी की लहर है और उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा है।

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    जतिन संभवत: आदमपुर के पहले ऐेसे नागरिक है जिन्होंने महज 26 साल की उम्र में ही सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट बन आदमपुर का नाम रोशन किया है। जतिन की सफलता पर उनके दादा कश्मीरी मित्तल, पिता सुनील मित्तल, मां वीना देवी, ताऊ अनिल, चाचा सुशील, सचिन व बड़े भाई नीतीश मित्तल ने हर्ष जताया है।

    सफलता की कहानी जज जतिन की जुबानी

    जतिन मित्तल ने बताया कि जज बनने का सपना उनके बड़े भाई नीतीश मित्तल का था जोकि अपने मौसी के लड़के अजय गर्ग से प्रेरित होकर जज बनना चाहते थे। किंतु आर्थिक तंगी के कारण अपने घर को स्पोर्ट करने के लिए उन्होंने अपना करियर वकालत में बनाया और दिल्ली जाकर वकालत शुरू की।

    इसके बाद उन्होंने अपनी कमाई मुझे भेजकर अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। लगातार मुझे जज बनने के लिए बोलते रहे। कालेज की छुट्टियों के दौरान अपने बड़े भाई न्यायाधीश अजय गर्ग के पास जाकर उनसे कोर्ट कार्यवाही के बारे में पूछता रहा और वहीं से जज बनने का फैसला लिया। अक्टूबर 2020 में एलएलबी अंतिम वर्ष की परीक्षा हिसार छाजूराम ला कालेज से टाप की।

    लाकडाउन की वजह से जज बनने की यात्रा घर पर ही रहकर शुरू की। आनलाइन कोचिंग, यू-ट्यूब व इंटरनेट मीडिया की मदद से खुद को जज बनने के लिए तैयार किया और अपने पहले प्रयास में एमपी ज्यूडिशियल सर्विस 2021-22 का इंटरव्यू दिया और उसके बाद 2021-22 उत्तराखंड ज्यूडिशियल सर्विस का एग्जाम देकर दिसंबर 2022 के फाइनल परिणाम में मेरा चयन सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट के तौर पर उत्तराखंड ज्यूडिशियरी में 9वीं रैंक के साथ हुआ है। जतिन ने बताया कि 10वीं-12वीं और किसी भी कक्षा के अंक आपका भविष्य तय नहीं करते हैं। बारहवीं कक्षा के अकाउंट विषय में केवल पास लायक अंक थे।

    मेरे बड़े बेटे नीतीश ने अथक मेहनत कर और अपने लक्ष्य को बीच में छोड़कर अपने छोटे भाई को सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट बनाया है। मुझे अपने दोनों बेटों पर गर्व है और भगवान ऐसे बेटे हर किसी को दे। मुझे विश्वास है कि नीतीश भी जल्द ही अपने व परिवार के सपने को पूरा करते हुए सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट बन परिवार की खुशियों को दोगुना करेगा। -सुनील कुमार मित्तल, जतिन मित्तल के पिता।

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    मेरा सपना था कि छोटा भाई जज बने और वह सपना अब पूरा हुआ है। मुझे खुशी है कि मैंने अपने पिता के कहने पर छोटे भाई जतिन मित्तल को स्पोर्ट कर उसे सिविल जज कम ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनाने का सपना पूरा किया। मेरा लक्ष्य है कि अब मैं स्वयं भी जज बन कर अपने पिता के सपने को पूरा करूं। - नीतीश मित्तल, जतिन का बड़ा भाई।