Haryana Weather: नाइट्रोजन बनकर गिरीं बूंदें तो प्राकृतिक खाद बना प्रदूषण, गेहूं-चने को संजीवनी; किसानों के खिले चेहरे
हरियाणा में हुई हल्की बूंदाबांदी ने फसलों, खासकर गेहूं को संजीवनी दी है। प्रदूषण के कण वर्षा के साथ घुलकर प्राकृतिक नाइट्रोजन बनकर खेतों तक पहुंचे, जि ...और पढ़ें

नाइट्रोजन बनकर गिरीं बूंदें तो प्राकृतिक खाद बना प्रदूषण (File Photo)
अमित धवन, हिसार। नए साल की हल्की बूंदाबांदी खेतों के लिए राहत की सौगात बनकर आई है। लंबे समय से हवा में जमे प्रदूषण के कण वर्षा के साथ घुलकर मिट्टी तक पहुंचे और गेहूं की फसल को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन उपलब्ध कराई।
दरअसल दिसंबर में अधिक तापमान के कारण देसी गेहूं में समय से पहले फुटाव शुरू हो गया था, जिससे फसल के कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी। अब तापमान में गिरावट, नमी और धूप के संतुलन से फसल का विकास दोबारा सही दिशा में बढ़ेगा।
गेहूं जौ, सरसों और चने की फसल के लिए ये लाभकारी है। तीन जिलों में कोहरे का रेड अलर्ट, तापमान में 2.5 का गैप: पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर आया है। प्रदेश में हल्की बूंदाबांदी के बाद दिन और रात के तापमान में अंतर कम हो गया है। हिसार में अधिकतम व न्यूनतम तापमान में 2.5 डिग्री का अंतर रह गया है। इससे ठंड बढ़ी है।
शनिवार को अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में कोहरे का रेड अलर्ट और बाकी प्रदेश में आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के नौ जिलों में कोल्ड वेव चलेगी, ठंड बढ़ेगी। नारनौल का रात का तापमान 4.5 डिग्री तक पहुंच गया है।
गेहूं की फसल में समय पूर्व ही बालियां फूटने लगी थीं, अब बचाव दिसंबर में तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण प्रदेश के हिसार, भिवानी और चरखी दादरी क्षेत्र में गेहूं की बालियां 60–65 दिन में ही फूटने लगी थीं। इससे पौधों की ऊर्जा समय से पहले खर्च होने लगी। जनवरी की बूंदाबांदी ने न केवल तापमान को संतुलित किया, बल्कि फुटाव की प्रक्रिया को स्थिर कर दिया। अब पौधे की ऊर्जा दाने की भरावट की ओर स्थानांतरित होगी, जिससे उपज बेहतर रहने की संभावना है।
उर्वरक बचत का फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार बूंदाबांदी के बाद 10–15% तक यूरिया की तात्कालिक जरूरत घट सकती है। सिंचित क्षेत्रों में एक सिंचाई की भी बचत संभव है, जिससे लागत कम होगी और मिट्टी पर रासायनिक दबाव घटेगा। एेसे काम करती है ‘प्रदूषण की खाद’: हल्की वर्षा के दौरान हवा में मौजूद नाइट्रेट नाइट्रोजन और अमोनियम नाइट्रोजन पानी में घुलकर सीधे मिट्टी और पौधों की जड़ों तक पहुंचती है। यह फुटाव, पत्तियों की हरियाली व दाने की गुणवत्ता मजबूत करती है।
हल्की बूंदाबांदी से मिली नाइट्रोजन फसल को ताकत देती है। पीलापन कम होगा, दाना भरने की प्रक्रिया बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा। -डॉ. ओपी बिश्नोई, वरिष्ठ गेहूं विशेषज्ञ, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार
अन्य फसलों पर असर
- गेहूं: फुटाव स्थिर, दाना मजबूत
- सरसों: पत्ती व फूल में सुधार l चना: नाइट्रोजन सपोर्ट से बढ़वार
- जौ: हरियाली और तना मजबूत
- राज्यवार गेहूं रकबा (अनुमानित)
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