Haryana Election 2024: मैं आदमपुर विधानसभा क्षेत्र हूं..., 17 विस चुनावों में चार उपचुनाव, भजनलाल नौ बार बने विधायक
आदमपुर विधानसभा सीट हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के गढ़ माना जाता है। भजनलाल इस सीट से नौ बार विधायक चुने गए। अभी तक इस सीट पर हुए 17 विधानसभा चुनावों में यहां भजनलाल के परिवार का ही दबदबा रहा है। भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई भी आदमपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं। जानिए आदमपुर सीट का इतिहास...

अमित गोयल, मंडी आदमपुर। मैं आदमपुर विधानसभा क्षेत्र हूं। हरियाणा बनने के बाद 1967 में आदमपुर में पहला चुनाव हुआ। अब तक इस सीट पर 17 विधानसभा चुनाव हुए है। जिसमें से चार उपचुनाव और बाकी 13 आम चुनाव थे।
इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व.भजनलाल के परिवार का ही कब्जा रहा है। वह सबसे ज्यादा नौ बार विधायक बने। वे सात बार कांग्रेस व एक-एक बार जनता पार्टी व हजकां पार्टी से विधायक बने। उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई चार बार विधायक चुने गए। तीन बार कांग्रेस व एक बार हजकां की टिकट पर विधायक बने।
जबकि एक-एक बार कुलदीप बिश्नोई की माता जसमा देवी, पत्नी रेणुका बिश्नोई व बेटे भव्य बिश्नोई विधायक चुने गए। ये तीनों अलग-अलग पार्टी से विधायक बने हैं। यह सीट भजन परिवार का गढ़ मानी जाती है।
पहली बार बने मुख्यमंत्री और भजनलाल से बने चौधरी भजनलाल
दरअसल, लोगों को चौ. भजनलाल की असाधारण राजनीतिक क्षमताओं के बारे में तब पता चला जब 1979 में उन्होंने चौ. देवीलाल की सरकार में डेयरी मंत्री रहते हुए तख्तापलट कर खुद की सरकार बना ली थी।
वह भी तब जब खतरे की आशंका के बीच चौधरी देवीलाल ने करीब 42 विधायकों को तेजाखेड़ा के अपने किलेनुमा फार्म हाऊस में रखा था। इनको बाहर आने-जाने की मनाही थी।
इसके बावजूद चौ. भजनलाल ने ऐसी राजनीतिक चाल चली कि दिग्गज देवीलाल मात खा गए और चौ.भजन लाल मुख्यमंत्री बन गए।
चौधरी भजनलाल ने सभी नौ चुनाव जीते
चौधरी भजनलाल ने इस सीट पर आठ आम चुनाव व एक बार उपचुनाव लड़ा। सभी चुनावों में जीत हासिल की। 1968, 1972, 1982, 1991, 1996, 2000, 2005 का चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीते। 1977 में जनता पार्टी की टिकट पर और 2008 में हजकां की टिकट पर उपचुनाव जीते।
36 से बन गए 52 विधायक
चौ. भजनलाल ने वर्ष 1982 के चुनाव में भी कमाल दिखाया। चौ.भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस को 36 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि भाजपा से चुनाव पूर्व गठबंधन के साथ मैदान में उतरे भारतीय राष्ट्रीय लोकदल को गठबंधन के साथ 37 सीटें मिली। सब कुछ राज्यपाल पर निर्भर था।
राज्यपाल जीडी तपासे ने पहले चौ. देवीलाल को 22 मई 1982 को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया, मगर चौ. भजनलाल ने निर्दलीयों की मदद से अपने पाले में 52 विधायक कर लिए। ठोस बहुमत के बल पर चौधरी भजनलाल दूसरी बार सीएम बने।
इस प्रकरण से चौ. देवीलाल के क्रोध की सीमा नहीं रही। वह भाजपा विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे। राज्यपाल से बहस के दौरान देवीलाल ने आपा तक खो दिया था। तब तक समीक्षक चौ. भजनलाल को राजनीति का पीएचडी कहने लग गए।
मंत्री से बने सीएम
1977 के विस चुनाव में जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई थी। उस समय जनता पार्टी को 75, कांग्रेस को तीन व विशाल हरियाणा पार्टी को पांच सीटें मिली थी।
देवीलाल को 75 सीट के बहुमत के साथ सत्ता संभालने में कोई मुश्किल नहीं हुई, मगर तब उन्हीं की सरकार में आदमपुर से विधायक व चौ. भजनलाल ने कुछ दिन बाद ही बाजी पलट दी।
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बेटे पर भरोसा कर खाई मात
1991 में भजनलाल तीसरी बार सीएम बने, मगर इसके बाद उनकी राजनीति को ग्रहण लग गया। 2005 में कांग्रेस को चौ.भजनलाल के नेतृत्व में बहुमत मिला लेकिन उन्होंने अपने बेटे कुलदीप बिश्नोई को हाईकमान से बातचीत के लिए भेजा।
कुलदीप बिश्नोई हाईकमान की बातों में बहक गए व भूपेंद्र हुड्डा सीएम बन गए। इसके बाद चौ. भजनलाल को गहरा सदमा लगा।
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