आदित्य राज, गुरुग्राम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के बौद्धिक को हरियाणा के प्रांत संघचालक पवन जिदल ने देश के विकास का रोड मैप करार दिया। यही नहीं, उन्होंने भागवत के बौद्धिक को पूरे विश्व के लिए भी अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अनुशासन, स्वदेशी, जैविक खेती पर जोर, समाज में सद्भाव सहित कई विषयों पर प्रमुखता से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर गंभीरता से ध्यान देकर ही देश विश्व गुरु बन सकता है।

रविवार शाम आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का बौद्धिक समाप्त होने के बाद दैनिक जागरण से बातचीत में प्रांत संघचालक पवन जिदल ने कहा कि इस तरह का बौद्धिक विजयादशमी के अवसर पर दिया जाता है। वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए संघ प्रमुख ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में, जहां भी संघ स्वयंसेवक या विचार से जुड़े लोग हैं, उनसे संवाद किया। सही मायने में यह बौद्धिक पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अनुशासन एवं स्वदेशी पर सबसे अधिक जोर दिया। ये दोनों विषय अपने देश के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। नकारात्मक शब्द है सोशल डिस्टेंसिंग

लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिग (सामाजिक दूरी) शब्द का प्रयोग उचित नहीं है। संघ प्रमुख ने फिजिकल डिस्टेंसिग (शारीरिक दूरी) पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने देश में तो समाज को जोड़ने की बात होती है, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिग जैसे शब्द का प्रयोग नहीं होना चाहिए। संघ प्रमुख के बौद्धिक के बाद सभी स्वयंसेवक लॉकडाउन का अनुशासन बनाए रखते हुए और अधिक जिम्मेदारी के साथ सेवा कार्य में लगेंगे।

Posted By: Jagran

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