सतीश राघव, सोहना (गुरुग्राम): देश की खातिर जान न्योछावर करने वाले बलिदानियों की शौर्य गाथा सुनकर सीना गर्व से फूल जाता है। यहां का गांव दमदमा बलिदनियों के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में दो जवानों ने मां भारती की रक्षा करते हुए जान की बाजी लगा दी थी। कारगिल युद्ध में इसी गांव के रहने वाले लांसनायक कंवर पाल ने सात पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार कर अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। लोग आज भी उनके बलिदान को भूले नहीं हैं। दुश्मन की ओर से चलाई गोली में से एक गोली उनके हाथ में लगी इसके बाद भी वीर जवान ने अपनी टुकड़ी के साथ मुकाबला किया और सात पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार दिया। तभी एक गोली उनके सीने पर लगी और भारत माता की जय बोलते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

उनकी तैनाती 24 राजपूत रेजीमेंट में थी। रेजीमेंट की एक प्लाटून गुरी सेक्टर में तैनात थी। रात को पाकिस्तानी सैनिकों ने आतंकियों के चोले में घुसने का प्रयास किया तभी सेना की टुकड़ी से उनका आमना-सामना हुआ था। कंवर पाल के पिता तथा दोनों बड़े भाई में सेना में रह चुके हैं। गांव के सतबीर बताते हैं कि कंवरपाल के बलिदान को गांव के लोग भूले नहीं हैं। युवाओं की पंसद आज भी फौज की नौकरी है। 30 से अधिक युवा फौज में भर्ती होकर सरहदों पर भारत माता की रक्षा कर रहे हैं। कंवरपाल की मां किसनो देवी ने अपने बेटे की अंतिम विदाई सैल्यूट कर दी थी। उनका कहना है कि पोते भी सेना में जाने को तैयार हैं।

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