गुरुग्राम सिविल अस्पताल में 10 साल बाद फिर शुरू होगा कैंसर इलाज, जनवरी अंत तक खुलेगा डे केयर सेंटर
गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित जिला सिविल अस्पताल में 10 साल बाद कैंसर मरीजों का इलाज फिर से शुरू होगा। कैंसर डे केयर सेंटर का निर्माण अंतिम चरण में है ...और पढ़ें

गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित जिला सिविल अस्पताल में 10 साल बाद कैंसर मरीजों का इलाज फिर से शुरू होगा। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित जिला सिविल अस्पताल में 10 साल के गैप के बाद कैंसर मरीजों का इलाज फिर से शुरू होगा। इससे इलाज की उम्मीद में यहां आने वाले कैंसर मरीजों की मुश्किलें कम होंगी। अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए कैंसर डे केयर सेंटर का निर्माण आखिरी स्टेज में है। जनवरी के आखिर तक सेंटर शुरू करने की कोशिशें जारी हैं। इलाज के लिए मशीनें और उपकरण आ गए हैं, और डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी गई है।
AIIMS झज्जर की एक टीम जल्द ही इंस्पेक्शन के लिए आएगी। इसके बाद, सेंटर में कैंसर मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा। कैंसर मरीजों का पहला कीमोथेरेपी सेशन AIIMS झज्जर में ही कराना ज़रूरी होगा। उसके बाद, रेफर किए गए कैंसर मरीजों का इलाज सिविल अस्पताल में बने कैंसर डे केयर सेंटर में किया जाएगा। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बार-बार झज्जर नहीं जाना पड़ेगा।
कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में जिला स्तर पर कैंसर डे केयर सेंटर खोलने की घोषणा की थी। जिला सिविल अस्पताल में बन रहे इस छह-बेड वाले सेंटर में कीमोथेरेपी इन्फ्यूजन की सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा, मरीजों को कैंसर की चुनौतियों से निपटने में मदद के लिए काउंसलिंग, साइड इफेक्ट्स को मैनेज करने में मदद और अन्य मेडिकल सपोर्ट मिलेगा। कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों की दवाएं भी यहां कम कीमत पर मिलेंगी, ताकि आम लोगों को इलाज के दौरान दवाओं के खर्च की वजह से आर्थिक मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
हिस्टोपैथोलॉजी लैब में कैंसर टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध
फिलहाल, जिला सिविल अस्पताल में फरवरी 2024 से एक हिस्टोपैथोलॉजी लैब चालू है। इस लैब में सरकारी स्तर पर कैंसर की टेस्टिंग की जाती है। यहां कैंसर के शक वाले मरीजों की बायोप्सी भी की जाती है। हर महीने 10 से 15 मरीजों में कैंसर की पुष्टि होती है। इनमें ब्रेस्ट कैंसर और मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या ज़्यादा है।
जिन मरीजों में कैंसर की पुष्टि होती है, उन्हें झज्जर या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। यहां का कैंसर वार्ड 2016 से बंद है। यहां कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. एसपी भनोट मार्च 2016 तक सेवाएं दे रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद से यहां कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर नियुक्त नहीं किया गया है।
इस महीने के आखिरी हफ़्ते तक सिविल अस्पताल में छह बेड वाले कैंसर डे केयर सेंटर को शुरू करने की कोशिशें चल रही हैं। हम AIIMS झज्जर टीम के इंस्पेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। मरीजों को यहां कीमोथेरेपी और दूसरी सुविधाएं मिलेंगी। यहां सिर्फ AIIMS झज्जर से रेफर किए गए कैंसर मरीज़ों का ही इलाज होगा। यह आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। - डॉ. लोकवीर, इंचार्ज CMO, गुरुग्राम।
वहीं, जिले की चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO), डॉ. अलका सिंह रिटायर हो गई हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद, एडमिनिस्ट्रेशन ने PMO डॉ. लोकवीर को CMO का एडिशनल चार्ज दिया है। अपने कार्यकाल के दौरान, डॉ. अलका सिंह ने हेल्थ सर्विसेज़ को बेहतर बनाने के लिए कई ज़रूरी कदम उठाए और अस्पतालों में सिस्टम को मज़बूत किया।
डॉ. लोकवीर पहले से ही सेक्टर-10 में डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल के PMO की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं, और अब, CMO का चार्ज मिलने के बाद, वे ज़िले की हेल्थ सर्विसेज़ के लिए ज़िम्मेदार होंगे। डॉ. लोकवीर ने कहा कि वे सरकारी नीतियों के हिसाब से हेल्थ सर्विसेज़ को और मज़बूत करने की कोशिश करेंगे, और आम जनता को बेहतर और आसानी से मिलने वाली मेडिकल सुविधाएं देना उनकी प्राथमिकता होगी।

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