विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गुरुग्राम: अमित गुप्ता की गिरफ्तारी ने बढ़ाई ग्रीनोपोलिस खरीदारों की चिंता, अधर में 1650 परिवारों का आशियाना

Published: Sun, 23 Aug 2026 07:33 PM (IST)

अमित गुप्ता की गिरफ्तारी से गुरुग्राम के ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट के 1650 होमबायर्स की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उनका घर ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. अमित गुप्ता की गिरफ्तारी से ग्रीनपोलिस खरीदारों की चिंता बढ़ी।

  2. 1650 परिवारों के घर का भविष्य अधर में लटका।

  3. खरीदार अपने घर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे।

गौरव सिंगला, नया गुरुग्राम। सेक्टर-89 स्थित ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट के करीब 1650 होमबायर्स की वर्षों पुरानी चिंता एक बार फिर सतह पर आ गई है।

ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित गुप्ता की मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद ग्रीनोपोलिस के खरीदारों में प्रोजेक्ट के भविष्य और अपने घर को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि, मुंबई में दर्ज मामला गोदरेज प्रापर्टीज से जुड़े एक अलग प्रोजेक्ट का है और इसका ग्रीनोपोलिस से कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है।

मुंबई पुलिस ने अमित गुप्ता को गोदरेज प्रापर्टीज की शिकायत पर विक्रोली थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया है। मामले में फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए हैं।

गिरफ्तारी की खबर ने ग्रीनोपोलिस के उन खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है, जो करीब एक दशक से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं और जिनका बड़ा हिस्सा पैसा पहले ही प्रोजेक्ट में लग चुका है।

दस साल से घर की आस में खरीदार

ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट वर्ष 2012-13 में ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर और थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त विकास समझौते के तहत शुरू हुआ था। होमबायर्स के अनुसार उन्होंने प्रोजेक्ट में करीब 1245 करोड़ रुपये का निवेश किया।

कई खरीदारों का कहना है कि उन्होंने फ्लैट की कीमत का 80 से 90 प्रतिशत तक भुगतान कर दिया था, लेकिन वर्ष 2016 के बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया। इसके बाद खरीदारों के लिए इंतजार लगातार लंबा होता चला गया। प्रोजेक्ट लंबे समय से कानूनी और नियामकीय विवादों में उलझा हुआ है।

विभिन्न पक्षों की ओर से वित्तीय अनियमितताओं, रकम के इस्तेमाल और खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों की जांच ईडी के स्तर पर भी हो चुकी है।

512 फ्लैटों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

होमबायर्स की एक बड़ी चिंता फेज-1 के 512 फ्लैटों को लेकर है। प्रभावित 3सी होमबायर्स का आरोप है कि करीब 90 प्रतिशत भुगतान किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में खरीदारों को अब तक अपने फ्लैट का कब्जा नहीं मिला है।

खरीदारों का यह भी आरोप है कि 3सी के हिस्से में आने वाले कुछ फ्लैट बाद में ओरिस के फेज-2 और फेज-3 से जुड़े खरीदारों को दिए गए या तीसरे पक्ष को बेच दिए गए। खरीदारों का कहना है कि यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो पहले से उलझा विवाद और जटिल हो सकता है।

इससे उन लोगों के लिए अपने अधिकार सुरक्षित कराना और मुश्किल होगा, जिन्होंने वर्षों पहले अपने घर के लिए जीवनभर की जमा पूंजी लगा दी थी।

मुआवजा नहीं, सिर्फ अपना घर चाहिए

प्रभावित होमबायर दीपिका मोहिल का कहना है कि खरीदार किसी अतिरिक्त लाभ या मुआवजे की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है, कि हम मुआवजा या किसी तरह का अतिरिक्त लाभ नहीं चाहते। हम सिर्फ वे घर चाहते हैं, जिनकी कीमत का लगभग पूरा भुगतान एक दशक पहले कर चुके हैं।

होमबायर्स ने सीबीआइ, ईडी, हरियाणा सरकार, आर्थिक अपराध शाखा, हरेरा और डीटीसीपी से प्रोजेक्ट के रिकार्ड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

खरीदारों का कहना है कि वास्तविक होमबायर्स के हित सुरक्षित किए जाएं और विवाद का अंतिम समाधान होने तक प्रोजेक्ट की संपत्तियों पर नए थर्ड पार्टी अधिकार बनाने या उनके हस्तांतरण पर रोक लगाई जाए।

खरीदारों के लिए अमित गुप्ता की गिरफ्तारी से ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि जिस घर के लिए उन्होंने वर्षों पहले अपनी कमाई लगा दी, वह उन्हें आखिर कब मिलेगा। लंबे समय से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट ने उनके लिए सिर्फ आर्थिक निवेश का नहीं, बल्कि घर और भविष्य के इंतजार का सवाल खड़ा कर दिया है।

यह भी पढ़ें- 271 करोड़ का फ्लैट, गगनचुंबी इमारतों की शान... ऐसे बंजर जमीन से देश की ‘लग्जरी सिटी’ बना गुरुग्राम

यह भी पढ़ें- रक्षाबंधन पर DDA का तोहफा: 'नागरिक आवास योजना' में 1,287 नए फ्लैट शामिल, 28 अगस्त से शुरू होगी बुकिंग