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    अरावली होगी हरी-भरी, दस हजार पौधे लगाने की तैयारी, इस दिन से शुरू हुआ अभियान

    By Jagran NewsEdited By: Rajesh Kumar
    Updated: Sun, 04 May 2025 05:30 PM (IST)

    सेव अरावली संस्था फरीदाबाद में अरावली की हरियाली बढ़ाने के लिए सक्रिय है। संस्था जंगल से बीज एकत्रित कर नर्सरी में पौधे तैयार कर रही है। वर्ष 2025 में दस हजार से अधिक पौधे लगाने की योजना है। अरावली में पौधारोपण की तैैयारी की जा रही है और लोगों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बीज एकत्रित करने के लिए रविवार को अभियान चलाया गया।

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    अरावली में पौधारोपण की तैैयारी, जंगल से बीच एकत्रित कर तैयार कर रहे पौधे

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सेव अरावली संस्था के पदाधिकारी अरावली में हरियाली बढ़ाने में जुटे हैं। रविवार को जंगल में मौजूद पेड़ों से बीज एकत्रित किए गए। इससे नर्सरी में पौधे तैयार किए जाएंगे। अगले साल बरसात के मौसम में जंगल में बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा।

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    वर्ष 2024 में तैयार पौधों को जून 2025 में अभियान चलाकर जंगल में लगाने की तैयारी की जा रही है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लोगों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    सेव अरावली ट्रस्ट के पदाधिकारी विजय बेनीवाल, वीरभान, राज घोष, आशुतोष, राजू, यश व गुरप्रीत ने बताया कि हर साल बारिश से पहले अरावली के जंगलों में मौजूद पेड़ों से बीज एकत्रित किए जाते हैं। बीज एकत्रित करने के लिए रविवार को अभियान चलाया गया।

    इसमें सेव अरावली के साथ 30 से अधिक लोगों ने भाग लिया। जंगल में मौजूद पलाश, जंगल जलेबी, शीशम, शिरीष व अमलतास समेत अन्य पेड़ों से बीज एकत्रित किए गए हैं। अंकुरित होकर पौधे बनने तक नर्सरी में इनकी देखभाल की जाएगी। पदाधिकारियों की मानें तो इस बार करीब तीस एकड़ में दस हजार से अधिक पौधे लगाने की योजना है।

    अगले साल की तैयारी शुरू, छह महीने में तैयार होते हैं पौधे

    संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले साल तैयार किए गए पौधे इस साल जंगल में रोपे जाएंगे। वर्ष 2026 में किए जाने वाले पौधरोपण की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। रविवार को जंगल से बीज एकत्रित किए गए। अब इन्हें नर्सरी में भेज दिया गया है।

    जंगल में पौधरोपण के बाद देखभाल के लिए दो माली नियुक्त किए गए हैं। इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को जोड़ा जा रहा है। पौधे रोपने के बाद संस्था के पदाधिकारी अरावली में जाकर उनकी देखभाल करते हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि जंगल में पौधे लगाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए।

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