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    Haryana News: नाबालिग बनकर सजा से बचना चाहता था दुष्कर्म का आरोपित, कोर्ट में पेश किए फर्जी कागजात

    Haryana News फरीदाबाद में दुष्कर्म के एक आरोपित ने सजा से बचने के लिए कोर्ट में उम्र से संबंधित फर्जी कागजात पेश किए। वह उम्र से संबंधित फर्जी कागजात का सहारा लेकर सजा से बचना चाहता था। पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया है।

    By Harender NagarEdited By: Abhishek TiwariUpdated: Mon, 03 Oct 2022 12:21 PM (IST)
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    Haryana News: नाबालिग बनकर सजा से बचना चाहता था दुष्कर्म का आरोपित, कोर्ट में पेश किए फर्जी कागजात

    फरीदाबाद, जागरण संवाददाता। नाबालिग किशोरी को भगाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपित ने सजा से बचने के लिए अदालत में फर्जी कागजात के सहारे खुद को नाबालिग साबित करने की कोशिश की। उसकी यह हरकत अदालत में पकड़ में आ गई। अब उसके खिलाफ सेंट्रल थाने में धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एक और मुकदमा दर्ज हुआ है।

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    यूपी का रहने वाला है आरोपित

    सेंट्रल थाना प्रभारी दिलीप कुमार के अनुसार मूलरूप से गांव अकबेलपुर गड़िया जिला मैनपुरी यूपी का रहने वाला शिव कुमार यहां गांव मुजैड़ी में रहता है। 13 जुलाई को उसके खिलाफ सदर बल्लभगढ़ नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

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    उसके पास से नाबालिग किशोरी को भी बरामद कर लिया गया। किशोरी को मेडिकल हुआ, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हो गई। पुलिस ने मुकदमे में दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ दीं। यह मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जैसमीन शर्मा की अदालत में विचाराधीन है। अब आरोपित ने अदालत से कहा कि वह नाबालिग है। यह साबित करने के लिए उसने कुछ कागजात भी अदालत में लगाए।

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    जांच में अदालत ने पाया कि उसके द्वारा लगाए गए कागजात फर्जी हैं। तब अदालत ने आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा है कि जिन लोगों ने यह फर्जी कागजात बनवाने और अदालत में पेश कराने में आरोपित की मदद की, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। सेंट्रल थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि कानून में नाबालिग को कम सजा का प्रविधान है।

    नाबालिग होने पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता है मुकदमा

    दुष्कर्म के मामले में बालिग को सात साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा का प्रविधान है। वहीं नाबालिग होने पर यह मुकदमा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता है। जिसमें दोषी साबित होने पर बोर्ड नाबालिग काे तीन साल तक के लिए बाल सुधार गृह भेज सकता है।]