Haryana: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार किया दुष्कर्म, गर्भवती हुई तो पैरेंट्स ने खिलाई गर्भपात की गोलियां
संदीप युवती से शादी नहीं कर रहा था। वह शादी का झांसा देकर उससे बार-बार उसके साथ सबंध करता रहा। इससे की वह गर्भवती हो गई। आरोप है कि 12 जून को माता-पिता ने युवती काे बहला फुसलाकर गर्भपात की गोलियां खिला दी।

फरीदाबाद, जागरण संवाददाता। शादी का झांसा देकर रिलेशनशिप में रह रहे युवक के खिलाफ थाना मुजेसर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। गर्भवती होने पर युवती के माता-पिता ने बेटी को गर्भपात की गोलियां खिलाई। इससे अब युवती ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
पुलिस ने बताया कि जब युवती की उम्र 15 साल थी, तब उसकी जान पहचान रोहतक के एक युवक संदीप सैनी से जान पहचान हुई। बात यहां तक पहुंच गई कि संदीप व युवती ने रिलेशनशिप में रहने का मन बना लिया। दोनों फरीदाबाद में रिलेशनशिप में रहने लगे, जबकि दोनों अविवाहित हैं, लेकिन युवती के माता-पिता दोनों का विरोध करते थे। 4 साल तक दोनों ठीक रहे, लेकिन कुछ महीने से उनके बीच अनबन रहने लगी।
चूंकि संदीप युवती से शादी नहीं कर रहा था। वह शादी का झांसा देकर उससे बार-बार सबंध बना रहा था। । इससे की वह गर्भवती हो गई। आरोप है कि 12 जून को माता-पिता ने युवती काे बहला फुसलाकर गर्भपात की गोलियां खिला दी। इस काम में संदीप सैनी ने भी उनका साथ दिया। जिसके बाद पीड़ित ने अब थाना मुजेसर पुलिस का सहारा लिया है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपी संदीप अभी फरार है।
गर्भपात की गोली खाने के बाद क्या होता है ?
गर्भपात की गोली या एबॉर्शन पिल्स हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए। आइये जानते हैं कि यह दवा किस तरह काम करती है।
- प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को बनने से या उसके क्रियाविधि को रोकती है।
- मायोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदुरुनी मध्य परत) को संकुचित करती है।
- ट्रोफोब्लास्ट (Trophoblast) को बढ़ने से रोकती है। ट्रोफोब्लास्ट वे कोशिकाएं होती हैं जो भ्रूण को पोषण देती हैं और प्लेसेंटा को विकसित करती हैं।
गर्भपात की गोली को इस्तेमाल करने का तरीका क्या है?
महिलाओं को दो अलग तरह की गोलियां लेनी पड़ती हैं। पहली गोली डॉक्टर की देखरेख में लेने के 36-48 घंटों के बाद दोबारा दूसरी गोली लेने के लिए डॉक्टर के पास आना पड़ता है।
पहली गोली गर्भपात के लिए गर्भाशय को तैयार करती है। आपको बता दें कि सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण को सहारा देती है और यह दवा उस सर्विक्स को नरम करती है। इसके अलावा यह प्रोजेस्टेरोन को रोकती है और गर्भाशय के सतह को तोड़ देती है। वहीं दूसरी गोली गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करती है जिससे भ्रूण के साथ यूटेराइन लाइनिंग बाहर निकल जाती है।
आमतौर पर गर्भपात की गोलियों को गर्भावस्था के शुरूआती हफ़्तों में ही लेने की सलाह दी जाती है इसके बाद में फिर सर्जिकल अबॉर्शन को ही उचित माना जाता है। हालांकि मेडिकल अबॉर्शन गर्भावस्था के 20 हफ़्तों तक मान्य है लेकिन एमटीपी एक्ट के अनुसार 12 हफ़्तों के बाद आप कम से कम दो गायनकोलॉजिस्ट की सलाह के बाद ही ऐसा करवा सकती हैं।
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