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    'बेरोजगारों की आंखों में पारदर्शिता की झूठी धूल न झोंके हरियाणा सरकार'- रणदीप सुरजेवाला का तीखा हमला

    By Jagran NewsEdited By: Rajat Mourya
    Updated: Tue, 06 Jun 2023 07:36 PM (IST)

    कांग्रेस महासचिव ने मुख्यमंत्री से पूछा कि अगर भर्तियों में पारदर्शिता के दावे सही हैं तो युवाओं को आरटीआई के माध्यम से भी उनकी जायज सूचनाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि इस सरकार में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं।

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    'बेरोजगारों की आंखों में पारदर्शिता की झूठी धूल न झोंके हरियाणा सरकार'- रणदीप सुरजेवाला का तीखा हमला

    चंडीगढ़, राज्य ब्यूरो। कांग्रेस महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने प्रदेश की सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार पर तीखा हमला बोला है। सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार इस प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं और उनके परिजनों की आंखों में पारदर्शिता की धूल झोंक रही है।

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    सुरजेवाला ने कहा कि यह पारदर्शिता न तो एचपीएससी की भर्तियों में है और न ही एचएसएससी में है। विश्वविद्यालयों में तो पारदर्शिता की उम्मीद करना ही बेमानी है। कांग्रेस महासचिव ने चंडीगढ़ में जारी एक बयान में मुख्यमंत्री से पूछा कि अगर भर्तियों में पारदर्शिता के दावे सही हैं तो युवाओं को आरटीआई के माध्यम से भी उनकी जायज सूचनाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि इस सरकार में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं। फिर उन्हें दबाने के लिए नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं।

    'HCS की भर्ती तो हर बार नया कलंक लेकर आती है'

    उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की एक भी भर्ती ऐसी नहीं है, जो प्रथम दृष्टया कोर्ट में न अटकी हो। कुछ भर्तियां तो ऐसी हैं, जिनको पूरा हुए 7-8 साल हो गए, लेकिन मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एचसीएस की भर्ती तो हर बार नया कलंक लेकर आती है। एचसीएस की 2019 की भर्ती में प्रारंभिक परीक्षा में 20 से अधिक प्रश्न ऐसे थे, जिनका हिंदी अनुवाद दिया ही नहीं गया था। यह मामला भी कोर्ट में फंसा। एचसीएस की पिछली भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में आयोग का डिप्टी सेक्रेटरी अनिल नागर ओएमआर शीट और करोड़ों रुपयों की अटैची के साथ पकड़ा गया।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने बाकी सभी घोटालेबाजों को साफ बचा लिया। एक साल गुजर जाने के बाद भी अभ्यर्थियों को न तो इनकी पिछली एचसीएस (प्री) परीक्षा के पेपर-I और पेपर-II के अंक बताए जा रहे और न ही कट आफ की जानकारी दी जा रही है। सुरजेवाला ने कहा कि अभ्यर्थियों को उनकी आंसर शीट दिखाने के राज्य सूचना आयोग के निर्णय के खिलाफ एचपीएससी अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चली गई थी। इस अपील को सर्वोच्च न्यायालय ने 2016 में खारिज कर दिया था। एचपीएससी ने अभ्यर्थियों को एक बार फिर से उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देनी बंद कर दी है।

    'अब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका है'

    उन्होंने कहा कि सभी चयनित उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका है। सरकार को कुछ काम अपने वादों और दावों पर भी कर लेना चाहिए अन्यथा बाद में पछताएंगे। रणदीप ने मांग की है कि भर्ती एजेंसियों के कारनामों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के जज की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए।

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