ब्रिटिश काल के एकमात्र कैथोलिक वायसराय लार्ड रिपन ने किया था अंबाला में होली रिडीमर चर्च का दौरा
अंबाला में स्थित होली रिडीमर चर्च अपने आप में इतिहास को समेटे है। ब्रिटिश काल में बना यह चर्च आज भी तनकर खड़ा है। हालांकि कोरोना को लेकर इस बार कोई अंब ...और पढ़ें

कुलदीप चहल, अंबाला
अंबाला में स्थित होली रिडीमर चर्च अपने आप में इतिहास को समेटे है। ब्रिटिश काल में बना यह चर्च आज भी तनकर खड़ा है। हालांकि कोरोना को लेकर इस बार कोई अंबाला कैंट की होली रिडीमर चर्च को क्रिसमस के दिन बंद रखा जाएगा। यह चर्च करीब 172 साल पुरानी है और आज भी यहां पर लोग प्रार्थना करने के लिए आते हैं। हालांकि इसके आसपास का स्वरूप बदल चुका है, जबकि इतिहास आज भी ब्रिटिश काल की याद दिलाता है।
अंग्रेजों ने अंबाला कैंट को 1843 में अपनी छावनी बनाया था। यहां पर इटेलियन कैपूचिन वीनेंस, जो दिल्ली से आए थे ने अपनी सेवाएं दीं। उनकी देखरेख में ही इस चर्च को बनाया गया, जो 1848 में बनकर तैयार हुई थी। अंबाला की यह पहली चर्च मानी जाती है। इसके बाद 1890 में पादरी के निवास में आग लग गई थी। इसके बाद 1895 में यहां पर उर्दू की प्राथमिक शिक्षा का स्कूल भी खोला गया था। 1902 में नए सिरे से चर्च को बनाने का काम शुरू किया गया, जो आज भी मौजूद है।
--------------- ब्रिटिश काल में वायसराय लार्ड रिपन जो एकमात्र कैथोलिक वायसराय थे, ने इस चर्च का दौरा किया था। वे कोलकाता से शिमला जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने अंबाला के इस चर्च में आने की इच्छा भी जताई थी। वे 1880 से 1884 तक वायसराय रहे थे। बताया जाता है कि आयरिश सैनिक भी उस दौरान अंबाला में ही तैनात थे। इस चर्च में करीब 800 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी।

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