नींद में सरकार! जिस मोरबी पुल पर 135 लोगों की जान गई; उसे गुजरात पर्यटन विभाग अब तक बता रहा इंजीनियरिंग का चमत्कार
Morbi Bridge गुजरात पर्यटन विभाग की ओर से बड़ा लापरवाही का मामला सामने आया है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मोरबी ब्रिज को वास्तुकला का चमत्कार बताया जा रहा है। साल 2022 में इस ब्रिज के टूटने की वजह से 135 लोगों की जान चली गई थी। पर्यटन विभाग के इस रवैये से मृतकों और पीड़ितों के परिवारजनों में नाराजगी है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात के मोरबी ब्रिज टूटने के दो साल बाद भी राज्य का पर्यटन विभाग उसे प्रमोट कर रहा है। 30 अक्टूबर 2022 में जिस ब्रिज (पुल) के टूटने की वजह से 135 लोगों की मौत हो गई थी, उसी पुल को गुजरात पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ' वास्तुकला का चमत्कार' बताया जा रहा है।
पर्यटन वेबसाइट पर मोरबी ब्रिज को 19वीं सदी के यूरोप जैसा बताते हुए “संकरी पत्थर की गलियों और ऐतिहासिक इमारतों” का उल्लेख किया गया है। ब्रिज को “विक्टोरियन लंदन की याद दिलाने वाला” और “उस युग का कलात्मक और तकनीकी चमत्कार” बताया गया है।
पर्यटन विभाग की लापरवाही से पीड़ितों में नाराजगी
गुजरात पर्यटन विभाग की यह एक बड़ी चूक मानी जा रही है। पर्यटन विभाग के इस रवैये से पीड़ितों के परिवारजनों में नाराजगी है।
लोगों की मांग है कि वेबसाइट को अपडेट किया जाए। आक्रोशित लोगों में से एक पंकज अमृतिया ने कहा कि इस दुर्घटना में उन्होंने परिवार के चार सदस्यों को खो दिया। जब भी मैं पुल से गुजरता हूं, तो मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता। मैं अक्सर रो पड़ता हूं। कई लोगों का मानना है कि इस स्थान को पर्यटक स्थल के बजाय एक स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि मृतकों को श्रद्धांजलि दी जा सके।
क्यों टूट गई थी ब्रिज?
इस हादसे की जांच के लिए SIT गठित की गई थी। स्पेशल टीम ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि ब्रिज पर लगे केबल के आधे तारों पर जंग लग गई थी और पुराने सस्पेंडर्स को नए से जोड़ दिया गया था, जिसकी वजह से ये हादसा हुआ था।
9 आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार
मोरबी में पुल टूटने से 300 से ज्यादा लोग डूब गए थे। प्रशासन को हादसे की खबर मिलते ही बचाव अभियान चलाया दिया गया था, लेकिन इस हादसे में 135 लोगों की जान चली गई। पुल टूटने के अगले दिन 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिसमें पुल की मरम्मत का ठेका पाने वाली कंपनी ओरेवा के दो मैनेजर, दो टिकट क्लर्क के साथ दो ठेकेदार और तीन सुरक्षा गार्ड शामिल थे।
कोर्ट में पेश किए गए ओरेवा कंपनी के मैनेजर ने इस हादसे पर बयान देते हुए इसे 'एक्ट ऑफ गॉड' बताया था। इसके बाद मोरबी और राजकोट बार एसोसिएशन ने आरोपियों का केस तक लड़ने से मना कर दिया था।
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