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    डॉन लतीफ के बेटे ने 17 लाख रुपये में खरीदा था मंदिर, केस हारने के बाद बिल्डर को बेची जमीन; ऐसे खुली पोल

    Updated: Fri, 23 May 2025 11:30 PM (IST)

    अहमदाबाद के त्रिकमजी मंदिर की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने के मामले में पुलिस ने बिलाल शेख समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। डॉन लतीफ के बेटे मुश्ताक ने 1999 में मंदिर की जमीन 17 लाख रुपये में खरीदी थी। मुश्ताक ने सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बावजूद जमीन को बिलाल शेख और उसके साथियों को बेच दी।

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    सिमरन डेवलपर्स के मालिक बिलाल शेख व उसके साथियों को बेच दी थी जमीन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात के प्राचीन त्रिकमजी मंदिर व उसकी जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर उसे बेचने के मामले में पुलिस ने बिलाल शेख समेत सात पर केस दर्ज किया है। वर्ष 1999 में मंदिर और उसकी जमीन को डॉन लतीफ के बेटे मुस्ताक ने 17 लाख रुपये में खरीदा था।

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    वर्तमान में जमीन की कीमत 4-5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जमालपुर अहमदाबाद में स्थित प्राचीन त्रिकमजी मंदिर के वैध मालिकाना हक का केस कोर्ट में हार जाने के बावजूद मुश्ताक ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मंदिर व उसकी जमीन सिमरन डेवलपर्स के मालिक बिलाल शेख व उसके साथियों को बेच दी थी।

    चैरिटी कमिश्नर जमीन का मालिक

    बिलाल व उसके साथी मोहम्मद असगर पठान, बाबू शाह, निजामुद्दीन शेख, जिशान कादरी, रोहन कादरी, सद्दाम हुसैन कुरैशी ने मिलकर मंदिर व उसकी जमीन पर कब्जा कर इसे बेचना शुरू कर दिया था। जबकि कानूनी रूप से चैरिटी कमिश्नर इसका मालिक है।

    गौरतलब है कि वर्ष 1966 में भोगीलाल त्रिकमलाल, महंत सियाराम दास, कांतिलाल शाह, बाबूलाल रावल को इसका ट्रस्टी बनाया गया था। इन चारों की गैरमौजूदगी में इसका मालिक चैरिटी कमिश्नर को घोषित किया गया था। सितंबर 1999 में डॉन लतीफ के बेटे मुश्ताक ने महंत सियाराम दास से 17 लाख में मंदिर खरीदने के दस्तावेज अपने नाम पर करा लिए थे।

    सुप्रीम कोर्ट में हार गया था मुश्ताक

    • चैरिटी कमिश्नर ने इसे गैरकानूनी बताया तो मामला कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बावजूद मुश्ताक ने यह जमीन बिलाल शेख व उसके साथियों को बेच दी। मुश्ताक का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था, बिलाल व उसके साथियों ने मंदिर व उसकी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद के नाम करा लिया।
    • इस धोखाधडी की भनक गायकवाड पुलिस थाने में तैनात एक मुस्लिम पुलिस निरीक्षक को लगी तो उसने इसकी जांच कर मामले को उजागर किया। जांच में पता चला कि लतीफ का बेटा मुश्ताक इस पूरे मामले में मुख्य साजिशकर्ता था।

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