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    उदयपुर में वरिष्‍ठ नागरिकों ने सीखे फैक्‍ट चेकिंग के टिप्‍स

    By Jagran NewsEdited By: Anurag Gupta
    Updated: Sun, 19 Nov 2023 05:13 PM (IST)

    देश की अग्रणी फैक्‍ट चेकिंग वेबसाइट विश्‍वास न्‍यूज ने रविवार को राजस्‍थान के उदयपुर में वरिष्‍ठ नागरिकों को फैक्‍ट चेकिंग की ट्रेनिंग दी। जागरण न्यू ...और पढ़ें

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    उदयपुर में वरिष्‍ठ नागरिकों ने सीखे फैक्‍ट चेकिंग के टिप्‍स (जागरण फोटो)

    डिजिटल डेस्क, उदयपुर। देश की अग्रणी फैक्‍ट चेकिंग वेबसाइट विश्‍वास न्‍यूज ने रविवार को राजस्‍थान के उदयपुर में वरिष्‍ठ नागरिकों को फैक्‍ट चेकिंग की ट्रेनिंग दी। इससे पहले शुक्रवार को ऐसी ही एक ट्रेनिंग का आयोजन जयपुर में किया गया था। जागरण न्‍यू मीडिया की फैक्‍ट चेकिंग वेबसाइट विश्‍वास न्‍यूज की ओर से यह प्रशिक्षण 'सच के साथी सीनियर्स' अभियान के तहत दिया गया। कार्यशाला लॉयन्स क्लब उदयपुर लेकसिटी में आयोजित की गई।

    क्या है फेक न्‍यूज और रियल न्‍यूज के बीच अंतर?

    जागरण न्यू मीडिया के एग्जीक्यूटिव एडिटर एवं फैक्ट चेकर जतिन गांधी और सीनियर एडिटर मयंक कुमार शुक्ला ने लोगों को ट्रेनिंग दी। दोनों प्रशिक्षकों ने फेक न्‍यूज और रियल न्‍यूज के अंतर को समझाते हुए उसे पहचानने के टिप्‍स दिए। उदयपुर के लिए आयोजित इस खास सेमिनार में डिजिटल सेफ्टी के बारे में विस्‍तार से बताते हुए जतिन गांधी ने कहा,

    डिजिटल डिवाइस के बिना जिंदगी आसान नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल के साथ सतर्क रहने की भी आवश्यकता है, ताकि हमारे साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो सके। समय-समय पर अपने डिवाइस को अपडेट करते रहें। साथ ही कहा कि सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करते हुए अपने पासवर्ड को सेफ रखें।

    यह भी पढ़ें: जयपुर में 'सच के साथी सीनियर्स' में बोले वरिष्ठ नागरिक- संदिग्ध सूचना को पहले चेक करेंगे

    क्या कुछ बोले सीनियर एडिटर मयंक?

    मयंक कुमार शुक्‍ला ने कहा कि 'सच के साथी' कार्यक्रम का लक्ष्‍य समाज को फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं से बचाना है। कार्यक्रम में उन्होंने फैक्ट चेकिंग, डिजिटल सेफ्टी और वोटर जागरूकता पर प्रशिक्षण के अलावा फेक न्‍यूज को पहचानने के टिप्‍स और ऑनलाइन टूल्‍स के बारे में भी जानकारी दी।

    कार्यक्रम में एक्‍सपर्ट ने बताया कि सोशल मीडिया में वायरल फर्जी खबरों से अलर्ट रहकर बचा जा सकता है। सेमिनार में मौजूद प्रतिभागियों को फैक्‍ट चेकिंग टूल्‍स के बारे में बताते हुए जतिन गांधी ने कहा,

    इंटरनेट पर कई ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध हैं और इनकी मदद से किसी भी वीडियो या तस्वीर की जांच की जा सकती है। गूगल ओपन सर्च, गूगल रिवर्स इमेज सर्च टूल, यान्‍डेक्‍स, इनविड जैसे टूल के माध्‍यम से फर्जी पोस्‍ट के बारे में पता लगाया जा सकता है।

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    जयपुर और मध्‍य प्रदेश में हो चुका है आयोजन

    उदयपुर से पहले मध्य प्रदेश के तीन शहरों भोपाल, इंदौर और जबलपुर के अलावा राजस्थान के जयपुर में इस तरह का जागरूकता कार्यक्रम हुआ है। भोपाल, इंदौर और जबलपुर के लोगों के लिए वेबिनार का भी आयोजन हो चुका है। इनमें प्रतिभागियों को फैक्ट चेकिंग टूल्स की मदद से संदिग्ध खबरों की पड़ताल करने के टिप्स दिए गए। इस कार्यक्रम का अकादमिक भागीदार माइका (मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस, अहमदाबाद) है।

    अभियान के बारे में

    'सच के साथी सीनियर्स' भारत में तेजी से बढ़ रही फेक और भ्रामक सूचनाओं के प्रति लोगों को सचेत करने वाला मीडिया साक्षरता अभियान है। इसका उद्देश्य 15 राज्यों के 50 शहरों में सेमिनार और वेबिनार की श्रृंखला के माध्यम से स्रोतों का विश्लेषण करने, विश्वसनीय और अविश्वसनीय जानकारी के बीच अंतर करते हुए वरिष्ठ नागरिकों को तार्किक निर्णय लेने में मदद करना है। रजिस्टेशन करने के लिए www.vishvasnews.com/sach-ke-sathi-seniors/ पर क्लिक करें।