मुंबई। फिल्म आनंद बॉलीवुड की सुपरहिट और सदाबहार फिल्मों में से एक है जिसका निर्देशन मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। इस फिल्म में सुपरस्टार राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन अहम भूमिका में थे। खास बात यह है कि, इस फिल्म ने 47 सालों का सफर 12 मार्च को पूरा कर लिया है। इस फिल्म ने 12 मार्च 1971 के दिन सिनेमाघरों में दस्तक दी थी। उस समय से लेकर आज तक यह फिल्म दर्शकों को हमेशा मनोरंजित करने के साथ जिंदगी जीने का एक नया तरीका सिखाती आई है और हमेशा प्रेरित करती है। 

फिल्म आनंद के 47 साल पूरे होने पर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी दो पोस्ट शेयर की है। पहली पोस्ट में उन्होंने फिल्म आनंद के 47 साल पूरे होने की जानकारी दी है। साथ में लिखा है, आनंद के जरिए ऋषि दा के साथ फिल्मों में काम करने की शुरूआत हुई थी। मैं खुशनसीब हूं कि उन्होंने इस फिल्म के लिए मुझे चुना। इसके जरिए मुझे सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ काम करने का मौका मिला। इसके साथ बिग बी ने आनंद फिल्म से जुड़ी कुछ दिलचस्प तस्वीरें साझा की हैं।

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दूसरी पोस्ट में अमिताभ ने एक बहुत पुरानी तस्वीर शेयर की है। यह तस्वीर 19वें फिल्मफेयर अवॉर्ड नाइट की है जिसमें वो कलाकार नजर आ रहे हैं जिन्हें अवॉर्ड मिला था। अमिताभ ने लिखा है कि, राजेश खन्ना को फिल्म आनंद के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया गया था। इस फंक्शन में आशा पारेख को बेस्ट एक्ट्रेस और राज कपूर को मेरा नाम जोकर के लिए बेस्ट डायरेक्टर का खिताब मिला था। अमिताभ को फिल्म आनंद के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और ऋषि दा को बेस्ट स्टोरी और बेस्ट पिक्चर का अवॉर्ड दिया गया था।

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अमिताभ बच्चन ने इस जानकारी को साझा करते हुए फिल्म आनंद से जुड़ी कुछ तस्वीरों को भी साझा किया है। प्रसिद्ध निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने कई सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया जिसमें सत्यकाम, आनंद, अनुपमा, अभिमान, गुड्डी, गोलमाल, बावर्ची, नमक हराम जैसी फिल्मों के नाम शुमार हैं। आपको बता दें कि, फिल्म आनंद के कई डायलॉग्स प्रसिद्ध हुए जो आज भी दर्शकों की जुबा पर रहते हैं। फिल्म में राजेश खन्ना कई बार अमिताभ को बाबूमोशाय कह कर बुलाते हैं। 

यह रहे प्रसिद्ध डायलॉग्स 

''बाबूमोशाय, जिंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ है, उसे न आप बदल सकते हैं न मैं''

''आनंद मरा नहीं, आनंद मरते हैं''

''अरे ओह बाबू मोशाय, हम तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं जिसकी डोर उस ऊपरवाले के हाथों में है। कब, कौन कहां उठेगा ये कोई नहीं जानता''

''बाबू मोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं...मौत के डर से अगर जिंदा रहना छोड़ू, तो मौत किसे कहते हैं? बाबू मोशाय जब तक जिंदा हूं, तब तक मरा नहीं हूं। जब मर गया, साला मैं ही नहीं। तो फिर डर किस बात का। 

Posted By: Rahul soni