Exclusive: 'कलयुग में कोई दूध का धुला नहीं...' रणबीर के राम बनने पर उठे सवाल, Ramayana एक्टर ने दिया जवाब
रामायण में विश्वामित्र की भूमिका निभा रहे एक्टर आजिंक्य देव ने रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) के राम बनने पर हुई ट्रोलिंग पर रिएक्शन दिया।

आजिंक्य देव ने रणबीर की ट्रोलिंग पर किया रिएक्ट। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम
HighLights
रणबीर कपूर की ट्रोलिंग पर आजिंक्य का जवाब
रामायण में विश्वामित्र की भूमिका निभा रहे आजिंक्य
आजिंक्य देव पहले दशरथ की भूमिका निभाने वाले थे
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की रामायण (Ramayana) में 'विश्वामित्र' की भूमिका मशहूर अभिनेता आजिंक्य देव (Ajinkya Deo) निभा रहे हैं। आजिंक्य देव ने दैनिक जागरण के साथ खास बातचीत में खुलासा किया कि वह पहले फिल्म में 'दशरथ' की भूमिका निभाने वाले थे। बाद में उन्हें श्रीराम के गुरु 'विश्वामित्र' का रोल मिला।
इसके अलावा आजिंक्य देव ने रणबीर कपूर की ट्रोलिंग को लेकर भी खुलकर बात की है। दरअसल, फिल्म के टीजर और ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही रणबीर को पुरानी छवि के चलते काफी ट्रोलिंग की जा रही है।
कभी उनके नॉन-वेज खाने वाले पुराने वीडियो को लेकर लोगों ने गुस्सा निकाला तो वहीं कभी पुराने वॉयलेंट किरदार की छवि भारी पड़ गई। यहां तक कि मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) ने भी फिल्म की कास्टिंग पर सवाल उठाया था।
रणबीर की ट्रोलिंग पर बोले आजिंक्य
अब आजिंक्य देव ने कहा कि कौन पहले क्या था, उससे क्या फर्क पड़ता है। उन्होंने हमसे कहा, "मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता हूं क्योंकि हर एक इंसान को याद रखना जरूरी है कि आखिरकार हम एक फिल्म बना रहे हैं और आज की तारीख में कलाकार जब उस रोल के लिए खुद को समर्पित कर देता है तो इसमें कोई डिफ्रेंस नहीं रह जाता है कि वह पहले क्या थे और पहले क्या किया। हम इंसान हैं। हम प्रभु राम चंद्र तो नहीं बन सकते हैं ना किसी भी हालत में।"

किरदार को 100 प्रतिशत देना जरूरी
आजिंक्य ने आगे कहा, "हम इंसान हैं और इंसान होते हुए हम उस किरदार को 100 प्रतिशत देकर निभा पाते हैं और अच्छे लगते हैं तो अतीत में जाने का क्या मतलब है कि कौन क्या था। इसका कोई मतलब ही नहीं है। हम कलयुग में हैं। हम सतयुग में तो नहीं हैं कि हर कोई दूध से धुला होगा और जिसने कभी पाप किया ही न हो।"
थिएटर्स में ऑडियंस करेगी सही-गलत का फैसला
उन्होंने यह भी कहा कि जब फिल्म थिएटर्स में लगेगी तो हर एक इंसान जो थिएटर्स में जाएगा, अपनी ओपनियन लेकर जाएगा और अपनी ओपिनियन लेकर बाहर आएगा। वे किसी को क्यों बताएं कि क्या सही है और क्या गलत है। आखिर में पब्लिक पैसा देकर जाएगी वो तय करेगा कि क्या सही है और क्या गलत।
