मुंबई। बंगाली साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास देवदास के ज़ितने रूप बड़े पर्दे पर आए हैं, उतने शायद ही किसी और साहित्यिक रचना के आए हों। लगभग सभी भाषाओं के सिनेमा में देवदास पर फ़िल्में बन चुकी हैं। हिंदी सिनेमा में भी देवदास को अलग-अलग वक़्त और अंदाज़ में पर्दे पर उतारा जा चुका है।

देवदास को अब नए कलेवर में पेश कर रहे हैं फ़िल्ममेकर सुधीर मिश्रा, जिनकी फ़िल्म का टाइटल 'दासदेव' है। 'दासदेव' 27 अप्रैल को रिलीज़ हो रही है। फ़िल्म में देवदास के रोल में राहुल भट्ट दिखायी देंगे। सुधीर का ये देवदास थोड़ा अलग होगा, क्योंकि फ़िल्म की पृष्ठभूमि राजनीतिक रखी गयी है। फ़िल्म में रिचा चड्ढा पारो और अदिति राव हैदरी चांदनी बनी हैं। चलिए अब आपको बाक़ी देवदासों से रू-ब-रू करवाते हैं।

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ब्रिटिश हुकूमत के दौर में देवदास पर सबसे पहले 1928 में साइलेंट फ़िल्म बनी थी, जिसे नरेश मित्रा ने डायरेक्ट किया था। उन्होंने फ़िल्म में एक रोल भी प्ले किया था। फणी बर्मा देवदास बने थे, तारकबाला पारो और पारुलबाला चंद्रमुखी के किरदार में थीं। ख़ास बात ये है कि फ़िल्म की शूटिंग कोलकाता में ही हुई थी, जहां की पृष्ठभूमि में देवदास उपन्यास की रचना की गयी है। ये फ़िल्म 11 फरवरी को रिलीज़ हुई थी।

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1935 में पीसी बरुआ ने बंगाली में देवदास बनायी, जिसमें केएल सहगल टाइटल रोल में थे, जबकि जमुना बरुआ और राजकुमारी ने क्रमश: पारो और चंद्रमुखी के किरदार प्ले किये थे। इसे 1936 में हिंदी में रिलीज़ किया गया।

1955 में बिमल रॉय के डायरेक्शन में दिलीप कुमार देवदास बने। ये हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्मों में शामिल है। दिलीप कुमार को इस फ़िल्म के बाद ट्रेजडी किंग कहा जाने लगा। देवदास पर बनी ये सबसे प्रभावी फ़िल्मों में शामिल है। फ़िल्म में सुचित्रा सेन पारो और वैजयंतीमाला चंद्रमुखी के किरदार में थीं।

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2002 में संजय लीला भंसाली ने शाह रूख़ ख़ान को देवदास बनाकर अमर कर दिया। फ़िल्म में माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी और ऐश्वर्या राय ने पारो का रोल निभाया। ये फ़िल्म सिनेमाई उत्कृष्टता के साथ संगीत और नृत्य के लिए मशहूर रही। ऐश्वर्या और माधुरी के संयुक्त नृत्य वाले दृश्यों ने ग़ज़ब की छाप छोड़ी।

देवदास का एक वर्ज़न ऐसा भी है, जिसे गुलज़ार बनाना चाहते थे। इस फ़िल्म में देवदास के किरदार के लिए धर्मेंद्र को चुना था, जबकि चंद्रमुखी और पारो के किरदारों के लिए उन्होंने शर्मिला टैगोर और हेमा मालिनी को फाइनल किया था। फ़िल्म का मुहूर्त भी हुआ, लेकिन बदकिस्मती से फ़िल्म इससे आगे नहीं बढ़ सकी। धर्मेंद्र को भी इसके बाद गुलज़ार के निर्देशन में काम करने का मौक़ा नहीं मिला। सोचिए, अगर ये फ़िल्म बनकर रिलीज़ होती तो धर्मेंद्र को देवदास के किरदार में देखना कितना दिलचस्प अनुभव होता।

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धर्मेंद्र भले ही देवदास बनने से चूक गए हों, लेकिन उनके भतीजे अभय देओल के ये मौक़ा मिल गया, जब अनुराग कश्यप ने उन्हें देव.डी में देवदास का किरदार निभाने का अवसर दिया था। देव.डी, बरसों पुराने देवदास का आधुनिक और सामयिक रूप था। फ़िल्म में माही गिल ने पारो तो कल्कि केकलां ने चंद्रमुखी का रोल निभाया था। एक गाने में आज के लोकप्रिय नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी ने भी एपीयरेंस दी थी। 

Posted By: Manoj Vashisth