Lata Mangeshkar ने रेलवे स्टेशन पर गाया ये गीत, सिगरेट की पैकेट से बनी थी धुन; रिजेक्ट होने के बाद रचा इतिहास
लता मंगेशकर ने 78 साल पहले रेलवे स्टेशन पर कंपोजर संग बैठकर एक ऐसा गीत गाया जो आज सदाबहार गानों ...और पढ़ें

रेलवे स्टेशन पर लता मंगेशकर ने गाया था गाना/फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
रेलवे स्टेशन पर बैठकर लता मंगेशकर ने गाया गीत
कंपोजर ने सिगरेट की डिब्बी निकालकर तैयार की धुन
78 सालों से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है गीत
एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। लता मंगेशकर ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत यादगार गाने दिए हैं। उन्होंने फास्ट ट्रैक गाए, लेकिन अपने सदाबहार गीतों से लोगों की आंखे भी नम कर दीं। लता दीदी की आवाज को कोई रिजेक्ट भी कर सकता है, यह सुनना थोड़ा अविश्वसनीय सा लगता है, लेकिन ऐसा हुआ है।
78 साल पहले लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज को जब एक निर्माता ने रिजेक्ट किया, तो कंपोजर ने सिंगर के साथ रेल्वे स्टेशन पर बैठे-बैठे एक ऐसा गाना बनाया, जो आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गानों में से एक है। कौन सा है ये कल्ट गीत, जिसके रिलीज से पहले ही कंपोजर ने कर दी थी भविष्यवाणी, पढ़ें उससे जुड़ा मशहूर किस्सा।
78 सालों से दिलों पर राज कर रहा है ये सदाबहार गाना
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के जिस सदाबहार गीत को आज तक हिंदी सिनेमा में सेलिब्रेट किया जाता है, वह साल 78 साल पहले रिलीज हुई फिल्म 'मजबूर' का है। 1978 में 'दिल मेरा तोड़ा ओ कहीं का ना छोड़ा' एक बड़ा हिट हुआ था, जिसे स्वर कोकिला ने अपनी मधुर आवाज में गाया था और इसका शानदार म्यूजिक मास्टर गुलाम हैदर ने दिया था।
हालांकि, ये गीत लता मंगेशकर को एक क्लर्क की वजह से मिला था। दरअसल, उस दौर में गुलाम हैदर नूर जहां जैसी सिंगर्स के साथ काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें उनके क्लर्क ने 18 साल की लता मंगेशकर के बारे में बताया। शाम को करीब 5 बजे गुलाम हैदर ने सुर सम्राज्ञी को बुलाकर गाना सुना। गुलाम हैदर को लता मंगेशकर की आवाज बेहद पसंद आई कि वह उन्हें शशधर मुखर्जी के पास ले गए। हालांकि, शशधर मुखर्जी ने लता मंगेशकर की आवाज को पतली बताकर रिजेक्ट कर दिया।

गुलाम हैदर ने लता मंगेशकर से रेलवे स्टेशन पर गवाया गाना
शशधर मुखर्जी से मुलाकात के बाद वापस आते वक्त शशधर मुखर्जी ने रेलवे स्टेशन पर अपनी सिगरेट की डिब्बी निकाली और लता मंगेशकर के साथ बैंच पर बैठ गए। वहां उन्होंने सिगरेट की डिब्बी पर बीट बजानी शुरु की और लता दीदी को एक नया गाना तैयार करने लगे। साल 1948 में जब मजबूर मूवी के लिए लता मंगेशकर ने ये गीत गाया तो एक बहुत बड़ा हिट हुआ और समय के साथ यादगार बन गया।
जब शशधर मुखर्जी ने लता मंगेशकर की आवाज को पतला बताकर उनकी आवाज को रिजेक्ट किया था, तो उस समय मास्टर गुलाम हैदर ने भविष्यवाणी करते हुए यह कहा था कि हिंदी सिनेमा में एक समय ऐसा आएगा, जब लोग इस लड़की (Lata Mangeshkar) के पास अपने गानों को गंवाने के लिए लाइन लगाकर खड़े रहेंगे। उनकी ये भविष्यवाणी बिल्कुल सच हुई और लता मंगेशकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी सिंगर बनकर उभरीं।
